ओटावाः कनाडा में हिंसक अपराधों से भारत का कोई संबंध नहीं है. ये ऐलान टोरेटों ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की नई दिल्ली यात्रा से पहले किया है. इस ऐलान ने सबको चौंका दिया है. टोरंटो ने कहा कि कनाडा में हिंसक अपराधों से भारत का अब कोई रोल नहीं है. कनाडा का यह बयान मार्क कार्नी के सत्ता संभालने के बाद भारत के प्रति बदले ओटावा के नजरिए का संकेत है. टोरंटो स्टार की खबर के मुताबिक, कनाडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह बयान पत्रकारों के साथ ब्रीफिंग के दौरान तब दिया, जब प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत की अत्यधिक प्रत्याशित यात्रा पर आने वाले हैं. वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने ओटावा और नई दिल्ली के बीच सुरक्षा वार्ताओं और सहयोग में प्रगति का वर्णन करते हुए कहा कि हमारे बीच बहुत मजबूत राजनयिक जुड़ाव है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच भी शामिल है और मुझे लगता है कि हम कह सकते हैं कि हम आश्वस्त हैं कि वह गतिविधि अब जारी नहीं है.
पहले भी भारत कनाडा के आरोपों को करता रहा है खारिज
भारत पर कनाडा में हिंसा में शामिल होने का आरोप तब लगा था, जब जस्टिन ट्रूडो प्रधानमंत्री थे. हालांकि, भारत ने हमेशा ही उन आरोपों को निराधार और बेतुका बताकर खारिज कर दिया था. टोरंटो स्टार आगे लिखता है कि इस ऐलान का भारत स्वागत करेगा, क्योंकि वह हमेशा इसे खारिज करता रहा है, लेकिन यह ब्रिटिश कोलंबिया के धार्मिक नेता मोनींदर सिंह जैसे सिख कार्यकर्ताओं की चिंताओं से टकराता है.
इस सप्ताह स्टार से बात करते हुए सिंह ने खुलासा किया कि वैंकूवर पुलिस अधिकारी ने उन्हें चेतावनी दी कि उन्हें, उनकी पत्नी और उनके बच्चों की जान को तत्काल खतरा है. सिंह ने कहा कि यह चौथी ऐसी चेतावनी है, जो उन्हें पुलिस से मिली है, तब से जब उनके दोस्त और साथी कार्यकर्ता हरदीप सिंह निज्जर को जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया के लोअर मेनलैंड में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
कनाडा के आरोपों से खराब हो गए थे भारत के संबंध
निज्जर की मौत ने कुछ महीनों बाद जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार से जुड़े एजेंटों पर आरोप मढ़े तो इस घटना ने तनावपूर्ण राजनयिक आयाम ले लिया. इसके बाद भारत-कनाडा के संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गए थे. हालांकि, भारत ने उनके आरोपों को निराधार, मनगढ़ंत बताते हुए खारिज कर दिया था. इसके बाद दोनों देशों से राजनयिकों के निष्कासन वाली झड़प से रिश्ते बेहत तनावपूर्ण हो गए. भारत हमेशा से यह कहता रहा है कि कनाडा सिख अतिवादियों को शरण देता है.
कार्नी सरकार का कहना है कि वह सुरक्षा खतरों को गंभीरता से लेती है और उन्हें संबोधित करने के लिए भारत के साथ काम कर रही है.
कनाडाई अधिकारियों ने बुधवार को साफ कह दिया कि भारत सरकार से जुड़े एजेंटों द्वारा कनाडा में सक्रिय विदेशी हस्तक्षेप और दमन जैसी कोई चिंताएं अब लागू नहीं होती. क्योंकि कनाडा की हिंसा से भारत का अब कोई लेना-देना नहीं है. कनाडा सरकार के एक बयान में कहा गया कि कानून का सम्मान भारत के साथ कनाडा के प्रयासों की कुंजी है. कानून प्रवर्तन संवाद के प्रति सम्मान भारत के साथ पुनः जुड़ाव के हमारे चरणबद्ध दृष्टिकोण का आधार बना रहेगा. फिलहाल ओटावा भारत के साथ संबंधों को रीसेट करने और दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के साथ गहरा व्यापार करने की कोशिश कर रहा है. भारत 1.4 अरब लोगों वाला उभरता आर्थिक शक्ति केंद्र है, जो कनाडा को डोनाल्ड ट्रंप के तहत अधिक अविश्वसनीय हो चुके अमेरिका पर व्यावसायिक निर्भरता से मुक्त करने में मदद कर सकता है.