US-Israel-Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने साफ शब्दों में कह दिया है कि उसे पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोई जरूरत नहीं है. यहां तक कहा कि शांति का दलाल बनने की जरूरत नहीं. पाकिस्तान खुद को इस संकट में पीस ब्रोकर के रूप में पेश कर रहा था और अमेरिका व ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा था. लेकिन ईरान ने इस प्रयास को खारिज कर दिया, इससे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है.
US के साथ बातचीत से भी इनकार
ईरान ने United States के साथ बातचीत से भी इनकार कर दिया है. उसने अमेरिका की ओर से रखी गई शर्तों को अस्वीकार्य बताया. जिससे साफ है कि फिलहाल किसी समझौते की संभावना बहुत कम है. इस फैसले से पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लगा है और उसकी भूमिका लगभग खत्म होती दिख रही है. अब क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है क्योंकि बातचीत के रास्ते बंद होते नजर आ रहे हैं.
सहयोगियों के लिए चिंता बढ़ाने वाला बयान
ईरान का यह बयान अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि यह जलमार्ग तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हालात में Qatar जैसे देश भविष्य में मध्यस्थता की भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन अभी स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है. ईरान के इस सख्त रुख ने मिडिल ईस्ट की स्थिति को और जटिल बना दिया है, जहां जंग और कूटनीति दोनों एक साथ चल रहे हैं लेकिन समाधान दूर नजर आ रहा है.
अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं
ईरान ने यह भी कहा है कि वह Strait of Hormuz में मौजूदा स्थिति को लंबे समय तक बनाए रखने की क्षमता रखता है. मुंबई स्थित ईरान के वाणिज्य दूतावास की ओर से जारी एक बयान में, तेहरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है. तेहरान ने वाशिंगटन पर मध्यस्थों के जरिए अनुचित मांग रखने का आरोप लगाया.
PAK के अपने डिप्लोमेटिक फोरम
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के डिप्लोमेटिक फोरम उनके अपने हैं. साथ ही स्पष्ट किया कि ईरान ने इसमें भाग नहीं लिया. तेहरान की ओर से ये बयान ऐसे समय में आया हैं जब पाकिस्तान ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष में संभावित मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है.
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