ईरान में गिरी सरकार तो पाकिस्तान को भुगतने होंगे परिणाम, टेंशन में मुनीर और शहबाज

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Iran Protests: ईरान में इस समय महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शन चरम पर है. देश के एक एक कोने में लोग सड़कों पर उतरे हुए है और ईरानी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार हस्तक्षेप करने की चेतावनी दे रहे हैं. ऐसे में यदि ईरान की सरकार गिर जाती है तो पाकिस्‍तान को इसके बुरे अंजाम भुगतने पड़ सकते है, क्‍योंकि ईरान में सरकार गिरने से पाकिस्‍तान पर भी काफी असर पड़ेगा.

दरअसल, अमेरिका की ओर से बार बार संकेत दिए जा रहे है कि वो कभी भी ईरान पर कार्रवाई कर सकता है. डोनाल्‍ड ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों को दबाया गया, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वो किस तरह की कार्रवाई करेंगे.

PAK में बढ़ गई चिंता

इस बीच ट्रंप के करीबी नेता लिंडसे ग्राहम ने कहा कि यदि मैं राष्ट्रपति ट्रंप की जगह होता तो ईरानी लीडर को मार देता. जहां ईरान को लेकर अमेरिका की तरफ से इतनी चेतावनी दी जा रही है. ऐसे में ईरान में तख्‍तापलट को लेकर पाकिस्‍तान की चिंता भी बढ़ गई है.

बलूच अलगाववादी को लेकर टेंशन

बता दें कि पाकिस्तान की चिंता ये नहीं है कि ईरान में सत्‍ता गिरती है या नहीं, उसकी सबसे बड़ी टेंशन अचानक हिंसक तरीके से सत्ता का गिरना है. दरअसल, ईरान और पाकिस्तान के बीच 900 किलोमीटर लंबी सीमा है. ऐसे में यदि ईरान में सत्‍ता गिरती है तो वहां किसी के हाथ में शक्ति नहीं होगा.

पाकिस्‍तान-ईरान के बीच लंबी सीमा

ऐसे हालात में बलूच अलगाववादी उग्रवादी समूह, जो पाकिस्तान और ईरान की लगभग 900 किलोमीटर लंबी साझा सीमा के दोनों तरफ एक्टिव हैं वो और ज्यादा ताकतवर हो सकते हैं. उन पर कोई नियंत्रण नहीं कर पाएगा. उन्हें ईरान के अंदर नए सुरक्षित ठिकाने मिल सकते हैं, हथियार हासिल करने के मौके बढ़ सकते हैं और उनकी गतिविधियों पर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाएगा.

स्‍पष्‍ट शब्दों में कहें तो पाकिस्तान को डर है कि ईरान में अराजकता फैलने से चरमपंथ और आतंकवाद उसकी पश्चिमी सीमा पर और बढ़ जाएगा, जिससे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, इसलिए इस्लामाबाद ईरान में स्थिरता चाहता है, न कि वहां हिंसक सत्ता परिवर्तन.

सीमा पर बढ़ जाएगा तनाव

इसके अलावा, इस समय पाकिस्तान का भारत और अफगानिस्तान के साथ सीमाओं पर रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं. ऐसे में यदि ईरान में सत्ता ढह जाती है तो ईरानी सीमा पर भी पाकिस्तान के लिए खतरा बढ़ जाएगा. फिलहाल पाकिस्तान अपने पश्चिमी मोर्चे पर भी युद्ध और अस्थिरता का बोझ नहीं उठा सकता.

शरणार्थियों का खतरा

वहीं, शरणार्थी भी पाकिस्‍तान की बड़ी समस्‍या है. अगर पड़ोसी देश में सत्ता ढह जाती है तो बड़ी तादाद में शरणार्थी पाकिस्तान का रूख कर सकते हैं, जो पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता का विषय है.

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