Global oil price surge Iran US tension: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते टकराव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है. इसका सीधा असर कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा है, जिससे आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ने लगा है.
कई देशों में बढ़े दाम, कहीं राशनिंग शुरू
तेल की कीमतों में तेजी के कारण कई देशों में ईंधन महंगा हो गया है, जबकि कुछ जगहों पर पेट्रोल पंपों पर राशनिंग भी लागू करनी पड़ी है. राशनिंग का मतलब है कि एक व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही ईंधन खरीदने की अनुमति दी जाती है, ताकि कमी की स्थिति में सभी को ईंधन मिल सके.
नेपाल में पेट्रोल-डीजल महंगा
नेपाल में Nepal Oil Corporation ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 15 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. नई दरें आधी रात से लागू हो गई हैं.
नई कीमतों के अनुसार:
- पेट्रोल: 184.50 से 187 रुपए प्रति लीटर (श्रेणी के अनुसार)
- डीजल/केरोसिन: 164.50 से 167 रुपए प्रति लीटर
यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण की गई है.
बांग्लादेश में जेट फ्यूल 80% महंगा
बांग्लादेश में स्थिति और गंभीर नजर आ रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में जेट फ्यूल की कीमतों में लगभग 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी गई है.
- घरेलू उड़ानों के लिए: 112.41 टका से बढ़कर 202.29 टका प्रति लीटर
- अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए: 0.738 डॉलर से बढ़कर 1.3216 डॉलर प्रति लीटर
यह फैसला वैश्विक बाजार में अस्थिरता और तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए लिया गया है.
पाकिस्तान और यूरोप में भी असर
आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है. वहीं यूरोप के कई देशों, खासकर Germany में गैस और पेट्रोल के दाम 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं.
थाईलैंड में शुरू हुई राशनिंग
थाईलैंड में पेट्रोल पंपों पर राशनिंग लागू कर दी गई है. इसका मतलब है कि एक व्यक्ति एक बार में सीमित मात्रा में ही ईंधन खरीद सकता है. यह कदम ईंधन की कमी और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है.
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं. इसका असर वैश्विक महंगाई, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ेगा. आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है.
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