Israel US Iran War: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जानकारी दी है कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की और उन्हें अमेरिकी पायलट के ईरान से रेस्क्यू के लिए चलाए गए सफल ऑपरेशन की बधाई दी.
नेतन्याहू ने दी ट्रंप को बधाई Israel US Iran War
बता दें, ईरान ने अमेरिका के दो फाइटर जेट ए-10 और एफ-15ई को ढेर कर दिया, इसमें एक पायलट ईरान में लापता हो गया था, जिसे कई घंटों के ऑपरेशन के बाद सफलतापूर्वक बचा लिया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद ट्रूथ सोशल के माध्यम से इसकी जानकारी दी. इजरायली पीएम नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मैंने पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की और व्यक्तिगत तौर पर उन्हें उनके हिम्मत वाले फैसले और दुश्मन के इलाके से निशाना बनाए गए पायलट को बचाने के लिए अच्छी तरह से किए गए अमेरिकी मिशन के लिए बधाई दी थी.”
अमेरिका के इस मिशन में इजरायल ने दिया साथ
इजरायली प्रधानमंत्री ने बताया कि अमेरिका के इस मिशन में इजरायल ने अमेरिका का साथ दिया. पीएम नेतन्याहू ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल की मदद के लिए उनकी सराहना की. उन्होंने कहा, “मुझे बहुत गर्व है कि लड़ाई के मैदान में और उसके बाहर हमारा सहयोग अभूतपूर्व है और इजरायल एक बहादुर अमेरिकी योद्धा को बचाने में मदद कर सका.”
ईरान ने अमेरिका के दावे पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया
दूसरी तरफ ईरान ने इस ऑपरेशन के सफल होने के अमेरिका के दावे पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया. फिनलैंड में ईरानी दूतावास ने कहा, “एक सवाल जिसका जवाब आप नहीं देंगे: बहादुरी भरा बचाव था या नाकामी को छिपाने की कोशिश? मान लेते हैं कि आप जो भी दावा कर रहे हैं वह सच है और आपने बिना किसी नुकसान के दूसरा बचाव किया. जैसा कि कहा जाता है, असंभव लगने वाली बातों पर भी कभी-कभी विश्वास करना पड़ता है. लेकिन मुद्दा यह है कि जिसे आप अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसिक सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन बता रहे हैं और जिसे दुनिया की सबसे पेशेवर और खतरनाक सेना ने अंजाम दिया, वह आखिरकार एक ही क्रू मेंबर को बचाने तक सीमित था.”
यह कोई ऐसा मौका नहीं है जिस पर गर्व किया जाए
ईरानी दूतावास ने आगे कहा कि इस एक रेस्क्यू ऑपरेशन में उतना समय और मेहनत लगी, जितना उन अभियानों में भी नहीं लगी जिन्हें आप कभी सरकार बदलने वाली तेज सफलता के रूप में पेश करते रहे हैं. सच तो यह है कि यह कोई ऐसा मौका नहीं है जिस पर गर्व किया जाए. लोग पहले से ही इस सेना के किए गए काम को लेकर शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं.

