अटलांटिक महासागर में दिखा 50 साल पहले डूबी गोल्ड सबमरीन का मलबा, 2 टन सोना होने का रहस्य बरकरार

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Japan Gold Submarine: अटलांटिक महासागर में साल 1944 की गर्मियों में एक I-52 नाम की एक जापानी पनडुब्बी उतरी और फिर किसी जादुई कहानी की तरह गायब हो गई, इसके बाद कई दशक तक इसका पता नहीं चल पाया. इस जापानी पनडुब्बी I-52 में क्रू के अलावा जर्मनी भेजा जा रहा सोना, दूसरे सामान और मेडिकल सप्लाई थी. इस पनडुब्बी में दो टन सोना लदे होने का अनुमान था. ऐसे में इसे गोल्ड सबमरीन कहा गया. आखिरकार खोजकर्ता साल 1995 में समुद्र के 3 मील नीचे उस जगह पहुंचे, जहां इसका मलबा था.

खोजकर्ताओं ने देखा कि 50 साल से अधिक समय बाद पनडुब्बी का ज्यादातर हिस्सा सीधा खड़ा था. इससे दूसरे विश्व युद्ध की सबसे अनोखी समुद्री कहानियों में से एक सुरक्षित रही और अंदर मौजूद खजाने के बारे में बिना जवाब वाले सवाल पीछे छूट गए।. हालांकि यह अभी एक रहस्य बना हुआ है कि क्या कीमती सोना आज भी इस मबले के भीतर है या नहीं.

I-52 कैसे जापान की कीमती पनडुब्बी

रिपोर्ट के अनुसार, साल 1944 तक जापान और जर्मनी के बीच व्यापारिक जहाजों का आना-जाना बहुत मुश्किल हो गया था. दूसरे विश्व युद्ध में मित्र देशों की नौसेना के दबदबे की वजह से सतह पर चलने वाले जहाजों के यूरोप पहुंचने से पहले पकड़े जाने का खतरा था. ऐसे में दोनों देश लंबी दूरी तक जाने वाली पनडुब्बियों पर निर्भर हुए, जो हजारों मील के खतरनाक पानी में कीमती सामान ले जाती थीं.

I-52 को बड़ी ट्रांसपोर्ट पनडुब्बी के तौर पर बनाया गया था। यह गायब होने से पहले जापान से निकली और अपना सामान लोड करने के लिए सिंगापुर रुकी. सामान में टिन, टंगस्टन और मोलिब्डेनम जैसी धातुएं, प्राकृतिक रबर, कुनैन और अफीम शामिल थे, जिनका इस्तेमाल सेना के लिए किया जाना था।. इसके सबसे कीमती सामान में करीब दो टन सोना था, जिसे 146 बार (ईंटों) में पैक किया गया था.

वे मैसेज जिनसे I-52 का पता चला

अटलांटिक में घुसने से पहले ही I-52 सबमरीन का ब्रिटिश और अमेरिकी कोडब्रेकर्स जर्मन और जापानी नेवल कम्युनिकेशन को पढ़ने में कामयाब रहे थे, उनको पता चल गया कि I-52 के जर्मन सबमरीन U-530 से कहां मिलेगी और ट्रांसफर कब होगा. 23 जून 1944 की देर शाम I-52 अटलांटिक के बीच में U-530 से मिलने के लिए सतह पर आई.

इसी दौरान बोग के एयरक्राफ्ट ऊपर पहुंच गए. इसके बाद जापानी सबमरीन पर भीषण हमला हुआ. ऐसे में अगले दिन तक अमेरिकी जहाजों को समुद्र में तैरता हुआ मलबा और बड़ी मात्रा में रबर मिला, जिससे पुष्टि हुई कि सबमरीन नष्ट हो गई थी. U-530 बिना पकड़े गए बच निकला. I-52 पर सवार सभी 109 लोग मारे गए.

पनडुब्बी पर बना रहा रहस्य

दरअसल, युद्ध के समय यह तो पक्का था कि पनडुब्बी डूब गई है लेकिन किसी को ठीक-ठीक नहीं पता था कि वह कहां है, हमला रात में, खराब मौसम में और किसी भी तट से बहुत दूर हुआ था, जिससे ये पनडुब्बी दुनिया की नजरों से गायब रही. दशकों तक इसे खोजने की कोशिश हुई और आखिर में 2 मई 1995 को पाया गया कि समुद्र की सतह से 17,000 फीट से ज्यादा नीचे समुद्र तल पर सीधी खड़ी एक बड़ी पनडुब्बी का मलबा है.

एक रिमोट से चलने वाले कैमरे को मलबे के ऊपर ले जाया गया, जिसने पिछले हिस्से (स्टर्न) के आस-पास की ऐसी डिटेल्स रिकॉर्ड कीं जो जापानी टाइप C3 ट्रांसपोर्ट पनडुब्बियों के खास डिजाइन से मेल खाती थीं. जहाज की हालत ने जांचकर्ताओं को हैरान कर दिया. दरअसल, टॉरपीडो से हुए नुकसान से ढांचा धीरे-धीरे पानी से भरा. इससे उसका बड़ा हिस्सा नीचे जाते समय सही-सलामत रहा. ऐसे में माना गया कि सोना इसके अंदर है.

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