Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के करीब 15 दिन बाद भी उनके अंतिम संस्कार की रस्में अभी तक पूरी नहीं हुई हैं. इस बात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल, शिया इस्लाम के अनुयायियों के बीच अंतिम संस्कार की रस्मों में तुरंत दफनाने पर जोर दिया जाता है. जब किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके शव को आमतौर पर गुस्ल यानी स्नान कराया जाता है और कफन नाम के एक सफेद कपड़े में लपेटा जाता है.
सुरक्षा बताई जा रही देरी की मुख्य वजह
इसके बाद जनाजा नमाज के बाद जितनी जल्दी हो सके शव को दफना दिया जाता है. खामेनेई के मामले में अंतिम संस्कार में देरी की मुख्य वजह सुरक्षा बताई जा रही है. क्योंकि वह ईरान के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक और धार्मिक हस्तियों में से एक थे इस वजह से उम्मीद है कि उनके अंतिम संस्कार के जुलूस में भारी भीड़ उमड़ेगी. अधिकारियों को ऐसा डर है कि मौजूद क्षेत्रीय तनाव के बीच लोगों का इतना बड़ा जमावड़ा किसी हमले या सुरक्षा संबंधी घटना का संभावित निशाना बन सकता है.
मजबूत ना हो जाएं सुरक्षा इंतजाम
यही वजह है कि कथित तौर पर अंतिम संस्कार को तब तक के लिए टाल दिया गया है जब तक कि सुरक्षा इंतजाम मजबूत ना हो जाएं. अगर किसी शव को कोल्ड स्टोरेज या फिर रेफ्रिजरेशन में रखा जाता है तो उसके सड़ने गलने की प्रक्रिया काफी धीमी हो जाती है. बिना किसी रासायनिक उपचार के भी किसी शव को आमतौर पर रेफ्रिजरेटेड वातावरण में कई हफ्तों तक सुरक्षित रखा जा सकता है.
सालों तक भी सुरक्षित रख सकती है प्रक्रिया
कई देशों में इस्तेमाल की जाने वाली एक और विधि है एम्बामिंग. इसमें शरीर से खून निकल कर उसके जगह फॉर्मेल्डिहाइड जैसे रासायनिक संरक्षक भर दिए जाते हैं. यह प्रक्रिया किसी शव को महीनों या सालों तक भी सुरक्षित रख सकती है. लेकिन इस्लामी परंपराओं में आमतौर पर इस प्रक्रिया से परहेज किया जाता है क्योंकि इसमें रसायनों का इस्तेमाल करके शरीर में बदलाव करना शामिल होता है.
काफी लंबे समय तक सुरक्षित
कुछ संस्कृतियों में शवों को ममीकरण के जरिए काफी लंबे समय तक सुरक्षित रखा गया है. यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें नमी को हटा दिया जाता है और सड़ने से रोका जाता है. प्राचीन सभ्यताएं इस तकनीक का इस्तेमाल शवों को दशकों या यहां तक कि सदियों तक सुरक्षित रखने के लिए करती थीं. क्योंकि इस्लामी रीति रिवाजों में आमतौर पर रासायनिक संरक्षण की अनुमति नहीं होती इस वजह से शवों को दफनाने तक आमतौर पर प्राकृतिक तरीके से ही सुरक्षित रखा जाता है. मृतक के शव को एक ठंडे, सूखे और सुरक्षित माहौल में रखा जाता है.
सुरक्षित कमरे में रखा जा सकता है ताबूत
सड़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए रेफ्रिजरेशन में या फिर बर्फ के साथ रखा जाता है. शव को गुस्ल और कफन में लपेटने के बाद उसे दफनाने की रस्म पूरी होने तक एक ताबूत में रखा जा सकता है या फिर एक सुरक्षित कमरे में रखा जा सकता है. बता दें कि ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई का निधन हो चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका निधन 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक संयुक्त हवाई हमले में हुआ था.
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