Kapalabhati Benefits: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खान-पान की गड़बड़ी, कम शारीरिक गतिविधि और बढ़ते तनाव के कारण मोटापा, कब्ज, साइनस से जुड़ी परेशानी और बेचैनी जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं. ऐसे में लोग दवाओं के साथ-साथ योग और प्राणायाम को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं. इन्हीं योग क्रियाओं में कपालभाति भी शामिल है, जिसे नियमित रूप से करने से शरीर और मन से जुड़े कई पहलुओं पर सकारात्मक असर पड़ सकता है. कपालभाति में सांस को तेजी और जोर के साथ बाहर छोड़ा जाता है, जबकि सांस अंदर अपने आप आती है.
आयुष मंत्रालय के तहत मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान की जानकारी के अनुसार, कपालभाति श्वसन मार्ग को साफ रखने, साइनस से जुड़ी समस्याओं और पाचन तंत्र के लिए उपयोगी हो सकती है. हालांकि, इसे सही तकनीक और अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही करना चाहिए.
क्या है कपालभाति?
कपालभाति को योग की एक श्वसन क्रिया माना जाता है, जिसमें पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करते हुए सांस को जोर से बाहर छोड़ा जाता है. इसके बाद सांस अंदर लेने के लिए अलग से जोर नहीं लगाया जाता, बल्कि वह स्वतः अंदर आती है. आयुष मंत्रालय की योग संबंधी सामग्री में भी कपालभाति में फोर्सफुल एक्सहलेशन और पैसिव इनहेलेशन की प्रक्रिया बताई गई है. शुरुआती लोगों को इसे धीरे-धीरे अभ्यास में शामिल करने की सलाह दी गई है.
पाचन तंत्र के लिए हो सकती है मददगार
कपालभाति के दौरान पेट की मांसपेशियों की लगातार सक्रियता होती है. आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह पेट के अंगों को सक्रिय करने और पाचन क्रिया को बेहतर करने में मदद कर सकती है. इससे पाचन तंत्र से जुड़ी सामान्य परेशानियों में राहत मिलने की संभावना बताई गई है. यही वजह है कि योग अभ्यास में कपालभाति को पेट और पाचन तंत्र से जुड़ी गतिविधियों के लिए उपयोगी माना जाता है. हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज या दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए.
साइनस और श्वसन तंत्र के लिए भी उपयोगी
कपालभाति का संबंध सिर्फ पेट से नहीं है. आयुष मंत्रालय की सामग्री के मुताबिक, यह श्वसन मार्ग को साफ रखने और अतिरिक्त म्यूकस को हटाने में मदद कर सकती है. इसे सर्दी, राइनाइटिस, साइनसाइटिस और कुछ ब्रोंकियल समस्याओं में उपयोगी बताया गया है. कपालभाति के दौरान सांस छोड़ने की सक्रिय प्रक्रिया होती है, जिससे श्वसन तंत्र पर काम होता है. हालांकि, सांस से जुड़ी बीमारी वाले लोगों को इसे अपनी स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.
एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता पर भी असर
कपालभाति को सिर्फ शारीरिक अभ्यास नहीं माना जाता. योग संबंधी सामग्री में इसे मस्तिष्क को सक्रिय करने और एकाग्रता तथा याददाश्त में मदद करने वाली क्रिया के रूप में भी बताया गया है. नियमित योग अभ्यास तनाव और बेचैनी को संभालने में भी मदद कर सकता है. हालांकि, किसी गंभीर मानसिक या शारीरिक समस्या में केवल कपालभाति पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है.
कैसे करें कपालभाति?
कपालभाति करते समय शरीर को आरामदायक स्थिति में रखते हुए सीधे बैठें. इसके बाद सांस को सामान्य तरीके से लें और पेट की मांसपेशियों को सिकोड़ते हुए सांस को जोर से बाहर छोड़ें. सांस अंदर लेने के लिए अतिरिक्त जोर न लगाएं, क्योंकि इस दौरान इनहेलेशन स्वतः और सामान्य रूप से होना चाहिए. आयुष मंत्रालय की सामग्री में शुरुआती लोगों के लिए कम स्ट्रोक और सीमित राउंड से शुरुआत करने तथा धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाने की बात कही गई है. अभ्यास के दौरान शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए.
किन लोगों को कपालभाति से बचना चाहिए?
कपालभाति हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं है. आयुष मंत्रालय के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्याओं, चक्कर, वर्टिगो, हर्निया और कुछ अन्य स्थितियों में कपालभाति से बचना चाहिए. कुछ आधिकारिक योग दिशानिर्देशों में सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को भी इसे न करने की सलाह दी गई है. महिलाओं को भी इसे सावधानी के साथ करने की सलाह दी गई है. गर्भावस्था या किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति में योग अभ्यास शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है. इसलिए कपालभाति को तेज गति से या लंबे समय तक करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए. अगर अभ्यास के दौरान चक्कर, सांस फूलना या असहजता महसूस हो, तो तुरंत रुक जाना चाहिए.
कुल मिलाकर, कपालभाति योग की एक ऐसी श्वसन क्रिया है जिसे सही तकनीक और सावधानी के साथ दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है. यह पाचन, श्वसन मार्ग और एकाग्रता से जुड़े कुछ पहलुओं में मदद कर सकती है, लेकिन इसे किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए.
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