29 September 2026 Ka Panchang: 29 सितंबर 2026, मंगलवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रहेगी. इस दिन तृतीया तिथि का श्राद्ध भी किया जाएगा. पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि शाम 05:11 मिनट तक रहेगी. इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी. मंगलवार को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा. इस दिन हर्षण योग देर रात 03:20 मिनट तक रहेगा, जबकि अश्विनी नक्षत्र सुबह 09:04 मिनट तक रहेगा. इसके बाद भरणी नक्षत्र शुरू हो जाएगा. आइए जानते हैं 29 सितंबर का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय….
29 सितंबर 2026 का पंचांग
- तृतीया तिथि: शाम 5 बजकर 11 मिनट तक
- हर्षण योग: देर रात 3 बजकर 20 मिनट तक
- अश्विनी नक्षत्र: सुबह 9 बजकर 4 मिनट तक, इसके बाद भरणी नक्षत्र
- विशेष: संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत
29 सितंबर के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:37 बजे से 5:25 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:01 बजे से 6:13 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:11 बजे से 2:58 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:10 बजे से 6:34 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 6:10 बजे से 7:22 बजे तक
- अमृत काल: 30 सितंबर की रात 3:06 बजे से सुबह 4:36 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:47 बजे से 30 सितंबर की रात 12:36 बजे तक
29 सितंबर का राहुकाल
- दिल्ली: दोपहर 3:10 बजे से शाम 4:40 बजे तक
- मुंबई: दोपहर 3:29 बजे से शाम 4:59 बजे तक
- चंडीगढ़: दोपहर 3:12 बजे से शाम 4:41 बजे तक
- लखनऊ: दोपहर 2:56 बजे से शाम 4:25 बजे तक
- भोपाल: दोपहर 3:10 बजे से शाम 4:40 बजे तक
- कोलकाता: दोपहर 2:26 बजे से 3:56 बजे तक
- अहमदाबाद: दोपहर 3:29 बजे से शाम 4:59 बजे तक
- चेन्नई: दोपहर 3:00 बजे से शाम 4:30 बजे तक
सूर्योदय और सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह 6:13 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:10 बजे
तृतीया तिथि वालों के लिए खास है यह श्राद्ध
पितृ पक्ष के दौरान जिस तिथि को पूर्वजों का निधन हुआ हो, उसी तिथि के अनुसार उनका श्राद्ध करने की परंपरा है. 29 सितंबर को दोपहर के समय तृतीया तिथि रहने के कारण उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाएगा, जिनका निधन किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था.धार्मिक मान्यता के अनुसार तृतीया तिथि पर श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और शत्रुओं तथा विरोधियों से जुड़ी परेशानियां दूर होने की कामना की जाती है.
इसलिए जिन परिवारों में पूर्वजों की मृत्यु तृतीया तिथि को हुई थी, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करना विशेष माना जाता है. साथ ही, 29 सितंबर को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा. माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से विघ्न-बाधाओं से मुक्ति की कामना की जाती है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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