Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा 2 देशों के कई शहरों से होकर गुजरेगी. जो शहर चुने गए हैं, वे तेहरान के इस्लामिक गणराज्य के धार्मिक, राजनीतिक और वैचारिक आधारों को दर्शाते हैं. राजकीय अंतिम यात्रा 4 जुलाई से शुरू होगी और 9 जुलाई को उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.
राजधानी तेहरान के अलावा कोम, कर्बला, नजफ और मशहद शहरों की शियाओं के बीच बहुत मान्यता है, जिनको खास तौर से खामेनेई की अंतिम यात्रा के लिए चुना गया है. तेहरान के ग्रैंड मोसाल्ला में शनिवार को आम लोगों के दर्शन के लिए अली खामेनेई का शव रखा जाएगा. मोसाल्ला का धार्मिक और राजनीतिक महत्व है.
तेहरान की सड़कों से अंतिम संस्कार यात्रा का गुजरना देश के राजनीतिक केंद्र से अंतिम विदाई का प्रतीक है, क्योंकि यहां राष्ट्रपति कार्यालय, संसद, न्यायपालिका, सैन्य मुख्यालय और राज्य के प्रमुख केंद्र हैं. यह जुलूस शोक की सार्वजनिक अभिव्यक्ति और बदलाव के दौर में देश के नेतृत्व की निरंतरता का संकेत है.
अली खामेनेई का जनाजा कोम भी जाएगा
शिया शिक्षा के केंद्र बिंदु कोम में अली खामेनेई का जनाजा ले जाया जाएगा. ये शहर ईरान के धार्मिक मामलों में अपना अलग ही स्थान रखता है. देश के सबसे प्रभावशाली धार्मिक शिक्षण संस्थानों का घर होने के नाते इस शहर ने धर्मगुरुओं की कई पीढ़ियों को शिक्षित किया है. कोम में खामेनेई के जनाजे का जाना वरिष्ठ धर्मगुरुओं और छात्रों को उनके आखिरी सफर में शामिल होने का मौका देगा.
इराक में कहां-कहां जाएगा खामेनेई का जनाजा
ईरान के शहरों के अलावा अली खामेनेई का जनाजा इराक भी ले जाया जाएगा, जहां का कर्बला शहर शियाओं के सबसे पवित्र शहरों में से एक है. यहां इमाम हुसैन की मज़ार है, जो तीसरे शिया इमाम थे. कर्बला में खामेनेई का जनाजा जाना ईरान के लिए कुर्बानी और दृढ़ता को मजबूत करेगा, जो इमाम हुसैन की विरासत से गहराई से जुड़े हैं.
इसके अलावा इराक के नजफ में भी खामेनेई का अंतिम संस्कार जुलूस निकाला जाएगा. यहां पहले शिया इमाम अली की मज़ार है. यह शहर दुनिया में शिया विद्वता के सबसे प्रतिष्ठित केंद्रों में से एक है. नजफ में कार्यक्रम आयोजित करने से ईरान की सीमाओं से परे पूरी शिया कम्युनिटी में खामेनेई की अहमियत जाहिर होगी.
जाने कहां होगा खामेनेई का अंतिम संस्कार
ईरान के पवित्र शहर मशहद में अली खामेनेई को दफनाया जाएगा. यहां इमाम रजा की मजार है, जिस पर हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं. अली खामेनेई का जन्म मशहद में हुआ था. उन्होंने अपनी शुरुआती जिंदगी यहीं पर बिताई थी.