मेघालय की बांग्लादेश सीमा पर BSF और BGB में तीखी बहस, घुसपैठिये को वापस लेने को तैयार नहीं बांग्लादेशी अधिकारी 

Aarti Kushwaha
Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Aarti Kushwaha
Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Meghalaya: भारत में घुसपैठ की एक और कोशिश को बीएसएफ ने नाकाम किया है. लेकिन बांग्लादेश की फोर्स घुसपैठिए को वापस लेने के लिए तैयार ही नहीं. और इसी बात को लेकर मेघालय की बांग्लादेश सीमा पर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB)के बीच जमकर बहस हो गई. जिससे मेघालय के साउथ वेस्ट गारो हिल्स ज़िले में महेंद्रगंज के पास नंदिरचर में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर तनाव पैदा हो गया.

अवैध रूप से भारत में घुसा बांग्लादेशी

दरअसल बांग्लादेशी अधिकारियों ने कथित तौर पर बीएसएफ द्वारा भेजे जा रहे भारतीय सीमा में अवैध रूप से घुसे बांग्लादेशी नागरिक को वापस लेने से इनकार कर दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह शख्स कथित तौर पर मेघालय बॉर्डर से गैर-कानूनी तरीके से भारत में घुसा था लेकिन बाद में वह BSF के हत्थे चढ़ गया. ऐसे में सिक्योरिटी फोर्स ने उसे कथित तौर पर बांग्लादेशी सीमा की तरफ वापस भेज दिया

बांग्लादेशी फोर्स ने लेने से किया इनकार

वहीं, इस घटना का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बांग्लादेश के जमालपुर के BGB और BSF जवान उस शख्स की नागरिकता और पहचान को लेकर बहस करते दिखाई दे रहे हैं. आरोप हैं कि BGB ने उस शख्स को वापस लेने से इनकार कर दिया. इसके बाद वह शख्स कथित तौर पर ‘नो-मैन्स लैंड’ (दो देशों के बीच की खाली ज़मीन) में फंसा हुआ है.

BSF और BGB के बीच तीखी बहस

बता दें कि कथित घुसपैठिया बांग्लादेश के राजशाही का रहने वाला 55 साल का हिंदू है. उसकी पहचान सती राजबंशी के तौर पर हुई है, जो राजशाही ज़िले के गुडागारी पुलिस स्टेशन और नारायणपुर पोस्ट ऑफिस के चालना गांव का रहने वाला है. वहीं BSF और BGB के बीच फ्लैग मीटिंग के बाद भी यह मामला सुलझ नहीं सका. अब वह व्यक्ति ‘नो-मैन्स लैंड’ में फंसा हुआ है. ऐसे में वह कहां जाएगा अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है.

 

Latest News

पीएम मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को 1330 दोहों वाली कौन सी किताब गिफ्ट की? जानें इसका रूस से क्या है कनेक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्रसिद्ध तमिल कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया. 133 अध्यायों और 1,330 दोहों वाली इस रचना का संबंध भारत और रूस के पुराने साहित्यिक जुड़ाव से भी बताया जाता है.

More Articles Like This