ईश्वर की आराधना और स्वधर्म पालन ही कल्याण का मार्ग: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान श्री सीताराम जी के विवाह में प्रधान रूप से पांच प्रसंग बताये गये हैं। नगर दर्शन लीला, पुष्प वाटिका, धनुष यज्ञ, परशुराम संवाद और श्री सीताराम विवाह। नगर दर्शन लीला में प्रभु श्री राम लक्ष्मण जनकपुर देखने के लिए जाते हैं।
श्री लक्ष्मण जी के मन में जनकपुर देखने की इच्छा जागृत हुई, भगवान उनके हृदय के भाव को समझकर गुरु जी से अनुमति मांगते हैं और सदगुरुदेव श्री विश्वामित्र जी ने अनुमति दे दिया। नगर दर्शन लीला में सबको भगवान का दर्शन हुआ। आध्यात्मिक दृष्टि से जीव संसार रूपी नगर को देखने आया है। अगर जीव अपने साथ परमात्मा को रखेगा तो संसार रूपी नगर में कहीं भी उसे कोई रुकावट नहीं आयेगी।
भगवान को साथ रखने का आध्यात्मिक अर्थ है, सदैव भगवान का स्मरण रखना। भगवान का स्मरण करते हुए संसार के कार्य करेंगे, तो संसार का कार्य भी हो जायेगा और भगवान का भजन और जीवन सफल होगा। पुष्प वाटिका प्रसंग में भगवान श्री सीताराम जी का मिलन बताया है। गुरु जी की सेवा-पूजा के लिए पुष्प लेने श्री राम लक्ष्मण पुष्प वाटिका पधारते हैं।
और गिरजा भवानी की पूजा के लिए मां की आज्ञा से सखियों के साथ भगवती सीता पहुंचती हैं। जहां श्री सीताराम जी का लीला में प्रथम मिलन होता है। अगर दुनियां का हर कुमार गुरु की सेवा में रहे और दुनियां की हर कन्या मां भगवती की आराधना करे तो संसार में कोई दुःखी नहीं रहेगा।
धनुष यज्ञ प्रसंग में पूरी धरती के राजा पधारे थे लेकिन किसी से धनुष नहीं हिला। सभी राजा इकट्ठा होकर भी बल लगा लिए लेकिन धनुष नहीं हिला। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्री राम ने धनुष भंग किया। इस प्रसंग में पूज्य गोस्वामी जी ने सफलता के चार सूत्र बताइये। आप किसी भी क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं तो पहली बात है ईष्ट निष्ठा। दूसरा सद्भावना। तीसरा – कार्य कितना ही बड़ा हो लेकिन घबराना नहीं, सफलता का सूत्र है धैर्य और चौथा सूत्र है माता-पिता गुरुजनों की कृपा। जिसके ऊपर बहुत लोगों का आशीर्वाद होता है उसके लिए कोई भी काम कठिन नहीं है।
लक्ष्मण-परशुराम संवाद में १८ दोहा है और श्रीमद्भगवत गीता में कुल १८ अध्याय हैं श्रीमद्भगवत गीता के तत्व को परशुराम संवाद में बताया गया है। गीता जी में भगवान कहते हैं- स्वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावहा।हर व्यक्ति को स्वधर्म पालन करना चाहिए। अगर कल्याण के लिए दो सूत्र कहा जाएं तो एक ईश्वर की आराधना और दूसरा स्वधर्म पालन।
श्री सीताराम विवाह में चारों भाइयों का विवाह एक ही मण्डप में हुआ। पूज्य गोस्वामी जी विवाह प्रसंग में जीव ब्रह्म को प्राप्त कर सके, हम आप भगवान को पावैं, इसके लिए सूत्र बताए। पहली बात मन की चंचलता को ईश्वर को सौंप देना, जहां भी मन जाए वहां ईश्वर का चिन्तन करना। दूसरा शतप्रतिशत भगवान की शरणागति स्वीकार करे। तीसरी कृपा गुरुदेव करते हैं। गुरुदेव वशिष्ठ ने सीताराम जी का गठबंधन किया और विवाह कराया।
गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज भगवान के विवाह की कथा श्रवण करने की फलश्रुति कहते हैं- जो भगवान की कथा प्रेम पूर्वक कहेंगे, सुनेंगे, उत्सव मनाएंगे, भगवान उसके जीवन को उत्सव बना देंगे।
सिय रघुवीर विवाह,जे सप्रेम गावहिं सुनहिं।
तिन कहं सदा उछाह मंगलाय तन राम जश।।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
Latest News

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने इजरायल, ग्रीस और साइप्रस को दी धमकी, कहा- आग लगाने की कोशिश की तो बुरा होगा अंजाम

Turkey: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप एर्दोगन ने बिना नाम लिए इजरायल, ग्रीस और साइप्रस को धमकी दी है. उन्होंने...

More Articles Like This