‘मुस्लिम NATO’ में एक और देश की एंट्री, सऊदी और तुर्की संयुक्त रक्षा समझौते पर करेंगे हस्ताक्षर 

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Muslim Nato: पाकिस्तान और सऊदी अरब ने मिलकर बीते वर्ष तथाकथित मुस्लिम नाटो की नींव रखी थी, अब उसमें एक और देश की एंट्री होने जा रही है. दरअसल, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की शुक्रवार को जेद्दा में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे. सऊदी सेना और सरकार से जुड़े सूत्रों के हवाले से मीडिया ने ये खबर छापी है. बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बाद क्षेत्रीय देश अपनी सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करना चाहते हैं. दरअसल, इस युद्ध के कारण खाड़ी देशों पर भी असर पड़ा है. साथ ही होर्मुज और लाल सागर से होने वाला समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है.

रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने कहा कि इस समझौते पर काफी समय से चर्चा चल रही थी, लेकिन हाल की क्षेत्रीय घटनाओं ने इसकी प्रक्रिया को तेज कर दिया है. वहीं, सऊदी सरकार से जुड़े एक अधिकारी ने पुष्टि की कि इस समझौते पर शुक्रवार को हस्ताक्षर किए जाएंगे.

सऊदी पहुंचे मुनीर और शरीफ

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान लाल सागर के तट पर बसे शहर जेद्दा में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात करेंगे.

बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर गुरुवार को सऊदी अरब पहुंचे, जहां वो लाल सागर के तट पर बसे शहर जेद्दा में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात करेंगे. तुर्की की राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, रेचेप तैयप एर्दोआन शुक्रवार को पहुंचेंगे.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह दौरा 6 अगस्त से 8 अगस्त तक होगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को कहा, “हालांकि यह दौरा खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच हो रहा है, लेकिन इसका महत्व सिर्फ मौजूदा संकट और छोटे समय के मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा.”

आखिर क्या है मुस्लिम नाटो?

NATO का पूरा नाम ‘उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन’ है. यह यूरोप और उत्तरी अमेरिका के 32 लोकतांत्रिक देशों का एक सैन्य और राजनीतिक गठबंधन है, जिसकी स्थापना साल 1949 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य अपने सदस्य देशों की सुरक्षा और स्वतंत्रता की रक्षा करना है. इस सैन्य संगठन का अनुच्छेद 5 के अनुसार, एक सदस्य देश के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामकता को सभी पर हमला माना जाएगा. बीते साल सितंबर में सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते की मूल बात भी यही थी. इस गठबंधन के सामने आने के बाद से ही इसे ‘मुस्लिम नाटो’ का नाम दिया जाने लगा.

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