Athens: भारत दशकों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है बावजूद, कुछ खास प्रगति नहीं दिखती थी. लेकिन, अब ब्रिक्स सम्मेलन में भारत को इस मामले में बडी सफलता हाथ लगी है. एथेंस स्थित ‘डायरेक्टस’ की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिक्स में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख और 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की संयुक्त बयान में चर्चा ने नई दिल्ली की स्थिति को मजबूत किया है.
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए
आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंडों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाकर ब्रिक्स ने उस दलील को मजबूती दी है जिसे भारत दशकों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है. भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए गए नई दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ व्यक्त रुख को भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, घोषणापत्र में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि आतंकवाद को राजनीतिक व्याख्या के जरिए वैध नहीं ठहराया जा सकता और रणनीतिक सुविधा के आधार पर आतंकवादियों के बीच भेद नहीं किया जाना चाहिए.
पाकिस्तान का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया
रिपोर्ट में कहा गया कि घोषणापत्र में पाकिस्तान का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया है. हालांकि, इस तथ्य को न तो छिपाया जाना चाहिए और न ही बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाना चाहिए. इसके बावजूद विभिन्न और कई बार एक-दूसरे से अलग रणनीतिक हित रखने वाले देशों के समूह द्वारा ऐसी शब्दावली स्वीकार किया जाना अपने आप में महत्वपूर्ण है. भारत के लिए इसका खास कूटनीतिक महत्व है.
पाकिस्तान के सामने एक असहज सवाल
‘डायरेक्टस’ ने कहा कि इस घटनाक्रम से पाकिस्तान के सामने एक असहज सवाल खड़ा होता है कि सीमा पार आतंकवाद से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय चर्चा आखिर कब तक उन बुनियादी ढांचों, संगठनों और वैचारिक नेटवर्क से अलग रखी जा सकती है, जिनके पाकिस्तान की जमीन से संचालित होने का आरोप भारत लगातार लगाता रहा है. इससे भारत की एक स्वतंत्र वैश्विक शक्ति के रूप में स्थिति मजबूत होती है और यह धारणा कमजोर होती है कि वह किसी एक भू-राजनीतिक गुट का हिस्सा मात्र है.
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