New Delhi: पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के अब्राहम समझौते में शामिल होने से इंकार करने के बाद उस पर अमेरिका भड़क गया है. अमेरिका में रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाया है. ग्राहम ने कहा कि ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव में पाकिस्तान निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं बन सकता. पाकिस्तान की इजराइल विरोधी सोच और पुरानी नीतियां उसकी मध्यस्थता को दोषपूर्ण बनाती हैं.
पाकिस्तान लंबे समय से नीति पर कायम
अब्राहम समझौता इजराइल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध सामान्य करने से जुड़ा समझौता है. ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से इस नीति पर कायम है कि जब तक 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र नहीं बनता, तब तक पाकिस्तान इजराइल को मान्यता नहीं देगा.
पाकिस्तान की इजराइल के प्रति पुरानी दुश्मनी
इसके बाद लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए पाकिस्तान की आलोचना की. उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका केवल दोषपूर्ण ही नहीं बल्कि इजराइल के प्रति उसकी पुरानी दुश्मनी भी साफ दिखाई देती है. ग्राहम ने कहा कि पाकिस्तान को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की उस अपील का जवाब देना चाहिए, जिसमें अमेरिका-ईरान युद्ध में मध्यस्थता करने वाले देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने को कहा गया था.
आज भी वही है पाकिस्तान की सोच
अमेरिकी सांसद ने यह भी कहा कि भले ही ख्वाजा आसिफ का एक वीडियो पुराना हो, लेकिन उन्हें लगता है कि पाकिस्तान की सोच आज भी वही बनी हुई है. उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान को साफ करना चाहिए कि वह इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने को लेकर क्या रुख रखता है. लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान पर एक और गंभीर आरोप लगाया.
इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं
उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें सामने आई हैं कि ईरानी सैन्य विमान पाकिस्तान के हवाई अड्डों पर रखे गए थे. हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले भी इजराइल विरोधी बयान दिए हैं, जिससे अमेरिका में चिंता बढ़ी है. यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और कई देश युद्ध रोकने के लिए कूटनीतिक कोशिशों में लगे हैं.
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