फिलिस्तीनी राष्ट्रपति को फिर नहीं मिली न्यूयॉर्क आने की इजाजत, अमेर‍िका ने वीजा देने से किया इनकार

United Nations: अमेर‍िका ने फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को वीजा देने से इनकार कर द‍िया है. ऐसे में भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उस प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया है, जिसके तहत फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास अगले हफ्ते होने वाली उच्च स्तरीय बैठक को वीडियो लिंक के जरिए संबोधित कर सकेंगे. बुधवार को यह प्रस्ताव भारी बहुमत से पास हुआ. इसके पक्ष में 152 वोट पड़े, जबकि सिर्फ अमेरिका, इजरायल और पैराग्वे ने इसके खिलाफ वोट दिया. चार अन्य देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया.

अब्बास वीडियो के जरिए संबोधित करेंगे

यह दूसरी बार होगा जब महमूद अब्बास संयुक्त राष्ट्र महासभा को वीडियो के जरिए संबोधित करेंगे. पिछले साल भी वीजा नहीं मिलने के बाद उन्होंने इसी तरह महासभा को संबोधित किया था. संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की उप-स्थायी प्रतिनिधि टैमी ब्रूस ने अब्बास को वीजा नहीं देने के फैसले का बचाव किया. उन्होंने फिलिस्तीनी पक्ष पर आतंकवाद को पूरी तरह न छोड़ने का आरोप लगाया.

हम इस मांग से पीछे नहीं हटेंगे

उन्होंने कहा क‍ि हम इस मांग से पीछे नहीं हटेंगे कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण और पीएलओ (फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन, जिसका प्राधिकरण पर नियंत्रण है) आतंकवाद को पूरी तरह और बिना किसी शर्त के छोड़ें. फिलिस्तीन को एक देश के रूप में पूरी मान्यता नहीं मिली है और संयुक्त राष्ट्र में उसे ऑब्जर्वर यानी पर्यवेक्षक का दर्जा हासिल है. संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन के स्थायी पर्यवेक्षक रियाद मंसूर ने दोहराया कि फिलिस्तीन अपने साथ-साथ इजरायल के भी ‘शांति और सुरक्षा’ के साथ रहने के अधिकार को मानता है.

पूरी मजबूती से मौजूद

उन्होंने कहा क‍ि हमें वीजा नहीं दिया गया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र के सामने सबसे बड़े मुद्दों में से एक, यानी फिलिस्तीनी लोग और उनका नेतृत्व, यहां मौजूद नहीं हैं. उन्होंने कहा क‍ि वे यहां पूरी मजबूती से मौजूद हैं. मंसूर ने कहा कि फिलिस्तीनी लोग तब तक अपनी बात रखते रहेंगे, जब तक उनके मुताबिक फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर इजरायल का ‘गैरकानूनी कब्जा’ खत्म नहीं हो जाता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहमति के मुताबिक दो-देश समाधान लागू नहीं हो जाता.

संप्रभु फिलिस्तीनी देश बने

उन्होंने कहा कि इसके तहत 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी देश बने, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो और जो इजरायल के साथ शांति और सुरक्षा के साथ रहे. चीन और रूस ने भी अब्बास को वीजा नहीं देने के लिए अमेरिका की आलोचना की. उनका कहना था कि संयुक्त राष्ट्र की मेजबानी से जुड़े समझौते के तहत वॉशिंगटन की जिम्मेदारी थी कि वह अब्बास को वीजा दे. सभी पश्चिमी देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया.

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