अब युद्ध भी लड़ने लगे हैं रोबोट, यूक्रेन ने पहली बार दो ह्यूमनॉइड रोबोट को युद्ध सीमा पर किया तैनात 

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Robot Army: फिल्मों में दिखने वाले रोबोट के एक्शन अब वास्तव में जंग के मैदान में भी दिखने लगे हैं. हाल ही में रूस-यूक्रेन जंग से रोबोट आर्मी के कुछ वीडियो सामने आए, जिसमे रूसी सैनिकों को यूक्रेन के एक हथियारबंद रोबोट के सामने सरेंडर करते तक देखा गया, जिसकी यूक्रेन के राष्ट्रपति ने भी की.

फ्रंटलाइन पर तैनात किए गए दो ह्यूमनॉइड रोबोट

13 अप्रैल को यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में रोबोट आर्मी को मिली एक बड़ी सफलता के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि रूसी सैनिकों ने यूक्रेन की रोबोट आर्मी के सामने सरेंडर किया है. अब पहली बार दो ह्यूमनॉइड रोबोट को यूक्रेन की युद्ध सीमा (फ्रंटलाइन) पर तैनात किया गया, जो बेहद सक्षम है. वहीं, मौजूदा स्थिति से यह साफ हो रहा है कि यूक्रेन रोबोट आर्मी के दौर में आगे निकल रहा है.

ह्यूमनॉइड रोबोट फैंटम Mk1 की खासियत

  • बता दें कि 6 फीट लंबे इस रोबोट का नाम फैंटम एमके1 (Phantom Mk1) है, जिसका वजन करीब 80 किलो है.
  • देखने में फिल्म ‘स्टार वॉर्स’ के बैटल ड्रॉइड जैसा लगने वाला यह रोबोट अपने साथ 40 किलो तक का वजन उठा सकता है.
  • इन रोबोट्स को बनाने वाली अमेरिकी स्टार्टअप कंपनी फाउंडेशन (Foundation) ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के साथ 24 मिलियन डॉलर (करीब ₹200 करोड़) का समझौता किया है.
  • इसके अलावा, कंपनी अगले कुछ वर्षो में ऐसे हज़ारों रोबोट बनाने की तैयारी में है.

दरअसल, कंपनी के सीईओ संकेत पाठक के मुताबिक, इन रोबोट्स को इस तरह डिज़ाइन किया गया है जो गिरने पर भी संभल सकें, भारी वजन उठा सकें और इसपर पानी या धूल का असर न हो. इनका इस्तेमाल सिर्फ सेना में ही नहीं, बल्कि कंस्ट्रक्शन (भवन निर्माण) जैसे भारी उद्योगों में भी किया जा सकता है.

फैंटम एमके1 की चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक अभी शुरुआती दौर में है और इसे पूरी तरह से कामयाब होने में लगभग एक दशक का समय लग सकता है.

  • बैटरी लाइफ: फैंटम एमके1 की बैटरी अभी एक घंटे से भी कम चलती है (हालांकि इसके अगले मॉडल एमके2 में इसे 6 घंटे करने का दावा किया गया है.
  • संतुलन: उबड़-खाबड़ रास्तों या युद्ध के मैदान में दो पैरों पर संतुलन बनाकर चलना बहुत मुश्किल काम है. पहियों वाले रोबोट के मुकाबले पैरों वाले रोबोट ज्यादा जटिल होते हैं.
  • साइबर सुरक्षा: ये रोबोट्स पूरी तरह से अकेले काम नहीं कर सकते, इन्हें कमांड देने के लिए संपर्क की जरूरत होती है, जिससे इनके हैक होने का खतरा हमेशा बना रहता है.
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