New Delhi: अरब लीग के महासचिव अहमद अबूल गैट ने कहा है कि यूक्रेन में रूस को सैन्य रूप से पराजित करना संभव नहीं है. उनका इशारा इस ओर था कि रूस के लिए यूक्रेन केवल एक युद्धक्षेत्र नहीं बल्कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा है. गैट ने यूक्रेन युद्ध और वैश्विक शक्ति संतुलन को लेकर अहम टिप्पणी की. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शीत युद्ध के दौर में भी विश्व की बड़ी शक्तियों ने परमाणु टकराव से बचने के लिए संतुलन बनाए रखा था और आज की वैश्विक राजनीति भी उसी सच्चाई से बंधी हुई है.
अपनी सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा रूस
शुक्रवार को भारतीय विश्व मामलों की परिषद (ICWA) द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अबूल गैट ने कहा कि शीत युद्ध के चरम समय में भी रूस, अमेरिका और चीन ने सीधे टकराव से परहेज़ किया क्योंकि ऐसा होने पर परमाणु हथियार सक्रिय हो जाते. आज भी वही वास्तविकता कायम है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रूस अपनी सैन्य और रणनीतिक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है. यूक्रेन में रूस को कोई पराजित नहीं कर सकता.
आप अफगानिस्तान में रूस को हरा सकते थे
अफगानिस्तान और यूक्रेन की तुलना अपने तर्क को ऐतिहासिक उदाहरणों से स्पष्ट करते हुए अरब लीग प्रमुख ने कहा कि आप अफगानिस्तान में रूस को हरा सकते थे क्योंकि वह मॉस्को से 11,000 मील दूर था. लेकिन यूक्रेन रूस के रणनीतिक और भौगोलिक केंद्र से जुड़ा हुआ है. अबूल गैट ने मौजूदा भू-राजनीतिक समीकरणों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका की कोशिश है कि रूस को चीन से अलग किया जाए ताकि वैश्विक शक्ति संतुलन में बीजिंग को अकेला किया जा सके.
रूस नाटो में शामिल होने की तलाश रहा था संभावना
अमेरिका यह समझता है कि रूस-चीन की नजदीकी उसके दीर्घकालिक हितों के लिए चुनौती है. अरब लीग प्रमुख ने 1990 के दशक का हवाला देते हुए कहा कि सोवियत संघ के पतन के बाद एक समय ऐसा भी था, जब रूस नाटो में शामिल होने की संभावना तलाश रहा था. उन्होंने बताया कि 1993-94 में व्लादिमीर पुतिन के उदय के शुरुआती दौर और राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के कार्यकाल में रूस ने नाटो से सहयोग बढ़ाने की कोशिश की.
इसे भी पढ़ें. Punjab Bomb Threat: पीएम मोदी के जालंधर दौरे से पहले तीन स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

