ब्रिटेन की समुद्री केबलों को रूस से खतरा, अमेरिका ने सुरक्षा के लिए भेजीं दो परमाणु ऊर्जा पनडुब्बियां

New Delhi: अमेरिका ने ब्रिटेन की समुद्री केबलों की सुरक्षा के लिए दो परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां भेजी हैं. ब्रिटेन के फर्स्ट सी लॉर्ड जनरल सर ग्विन जेनकिंस ने हाल ही में अटलांटिक की सुरक्षा पर बड़ा जोर दिया. उन्होंने कहा कि समुद्र के नीचे मौजूद केबलें आज के जीवन की रीढ़ हैं. इनके जरिए डेटा, लेन-देन और संचार चलता है. ब्रिटेन की ऊर्जा, कारोबार और संचार व्यवस्था अटलांटिक से गहराई से जुड़ी है. ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा अमेरिका और यूके के बीच होता है.

केबलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति

ब्रिटेन और अमेरिका के बीच समुद्री केबलों के जरिए यह होता है. इसीलिए इन केबलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति को गंभीर माना जा रहा है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि एक केबल कटते ही ब्रिटेन की पूरी बैंकिंग व्यवस्था तुरंत बंद हो जाएगी. नेटवर्क में कई वैकल्पिक रास्ते भी होते हैं. लेकिन बड़े पैमाने पर अगर केबल काटी जाती हैं तो इससे लेन-देन, डेटा और संचार में गंभीर बाधा आ सकती है. इन केबलों के लिए सबसे अहम इलाकों में GIUK गैप शामिल है.

रूस की समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए महत्वपूर्ण

इसका मतलब है ग्रीनलैंड, आइसलैंड और ब्रिटेन के बीच का समुद्री क्षेत्र. यह इलाका उत्तरी अटलांटिक में बेहद अहम है. ब्रिटेन की नौसेना भी इसे रूस की समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए महत्वपूर्ण मानती है. ब्रिटेन ने इस क्षेत्र में समुद्र के नीचे निगरानी और सेंसर नेटवर्क मजबूत करने की योजनाएं शुरू की हैं. रॉयल नेवी के मुताबिक, रूस की बढ़ती समुद्री और पनडुब्बी गतिविधियों के बीच उत्तरी अटलांटिक की सुरक्षा ब्रिटेन की प्राथमिकता बन गई है.

सुरक्षा करने की पर्याप्त ताकत नहीं

सैन्य सूत्र के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन के पास फिलहाल इन समुद्री लाइनों की हर जगह सुरक्षा करने की पर्याप्त ताकत नहीं है. इसलिए अमेरिका से मदद ली जा रही है. इसी संदर्भ में दो अमेरिकी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों की तैनाती की बात सामने आई है. इनका काम समुद्र के नीचे रूसी गतिविधियों पर नजर रखने और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में मदद करना बताया गया है. यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि ब्रिटेन खुद अपनी नौसेना को तेजी से आधुनिक बनाने और समुद्र के नीचे मौजूद ढांचे की सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दे रहा है.

रोकने की क्षमता सीमित

पश्चिमी देशों में चिंता इस बात को लेकर बढ़ी है कि रूस समुद्र के नीचे मौजूद महत्वपूर्ण ढांचे की निगरानी और उसकी मैपिंग कर रहा हो सकता है. डिफेंस विशेषज्ञ टिम रिप्ले ने भी दावा किया है कि रूस पश्चिमी देशों की समुद्री केबलों को मैप कर रहा है और उन्हें रोकने की क्षमता सीमित है. अभी बड़ा सवाल यही है कि समुद्र के नीचे चल रही यह निगरानी भविष्य में किस दिशा में जाती है.

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