US Afghanistan Crisis: अमेरिका ने अफगानिस्तान को एक ऐसे देश के रूप में घोषित किया है जो ‘गलत तरीके से लोगों को कैद’ करता है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तालिबान पर यह आरोप लगाया है कि वो अपनी शर्ते या मांग मनवाने के लिए अमेरिकी और अन्य विदेशी नागरिकों को बंदी बना रहे हैं.
रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन तालिबान अधिकारियों की होस्टेज डिप्लोमेसी को बर्दाश्त नहीं करेगा. रुबियो ने कहा कि “आज, मैं अफगानिस्तान को गलत तरीके से हिरासत में रखने वाले देश के तौर पर घोषित कर रहा हूं.”
अमेरिका ने तालिबान पर लगाए ये आरोप
अमेरिकी विदेश मंत्री ने तालिबान पर राजनीतिक फायदा उठाने के लिए लोगों को हिरासत में लेने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि “तालिबान आतंकवादी तरीकों का इस्तेमाल करना जारी रखे हुए है, फिरौती के लिए लोगों को किडनैप कर रहा है या नीति में छूट चाहता है. इन घटिया तरीकों को खत्म करने की जरूरत है.”
मार्क रूबियो की ओर से यह घोषणा अफगानिस्तान में अमेरिकियों की लगातार हिरासत को हाईलाइट करने और तालिबानी नेतृत्व पर उन्हें रिहा करने का दबाव बनाने के लिए की गई है. रुबियो का कहना है कि यह स्थिति उन अमेरिकियों के सामने आने वाले खतरों को भी दिखाती है जो देश की यात्रा करने की कोशिश करते हैं.
अमेरिकी नागरिकों को दी अफगानिस्तान की यात्रा न करने की सलाह
उन्होंने कहा कि “अमेरिकियों के लिए अफगानिस्तान की यात्रा करना सुरक्षित नहीं है क्योंकि तालिबान हमारे साथी अमेरिकियों और दूसरे विदेशी नागरिकों को गलत तरीके से हिरासत में लेना जारी रखे हुए है.”
अमेरिकी विदेश मंत्री ने खास तौर पर कई कैदियों को तुरंत रिहा करने की मांग की. उन्होंने कहा कि “तालिबान को डेनिस कोयल, महमूद हबीबी और अफगानिस्तान में गलत तरीके से हिरासत में लिए गए सभी अमेरिकियों को अब रिहा करना चाहिए और बंधक बनाने की डिप्लोमेसी को हमेशा के लिए बंद करने का वादा करना चाहिए.”
विदेशी नागरिकों को राजनीतिक फायदें के लिए लेते है हिरासत में
अमेरिकी राज्य विभाग के बयान में इस कदम को उन सरकारों या अधिकारियों को रोकने की एक बड़ी कोशिश के हिस्से के तौर पर बताया गया है जो राजनीतिक फायदा उठाने के लिए विदेशियों को हिरासत में लेते हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने बार-बार चेतावनी दी है कि जिन देशों के डिप्लोमैटिक संबंध कम हैं, वहां जाने वाले अमेरिकियों को मनमानी हिरासत का ज्यादा खतरा होता है.
यह नाम तालिबान अधिकारियों के प्रति अमेरिका के सख्त रवैये का भी संकेत देता है, जिन्होंने अगस्त 2021 में काबुल पर कब्जा करने के बाद से अफगानिस्तान पर शासन किया है. अमेरिका तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं देता है, लेकिन मानवीय और सुरक्षा मुद्दों पर सीमित डिप्लोमैटिक चैनलों के जरिए बातचीत जारी रखता है.
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