US-Venezuela Tension : निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव चरम स्तर पर पहुंच चुका है. बता दें कि इसी बीच अमेरिका ने वेनेजुएला के लिए एक और सख्त आदेश जारी कर दिया है, जिसने वैश्विक भू-राजनीति के साथ तेल बाजार दोनों में हलचल मचा दी है. इस मामले को लेकर अमेरिका ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वेनेजुएला को चार देशों, चीन, रूस, ईरान और क्यूबा के साथ अपने संबंध कम करने होंगे. इन्हीं में रूस भारत का करीबी मित्र भी है, जिससे इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत समेत कई देशों की रणनीति पर पड़ सकता है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को स्पष्ट निर्देश दिए और कहा कि वेनेजुएला तेल उत्पादन में केवल अमेरिका के साथ विशेष साझेदारी करे. इसके साथ ही भारी कच्चे तेल की बिक्री में अमेरिका को प्राथमिकता दे या चीन, रूस, ईरान और क्यूबा के साथ आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते सीमित या खत्म करें.
अमेरिका इन सभी शर्तों को स्वीकार करेगा तो…
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तीन अज्ञात अमेरिकी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि वेनेजुएला को अधिक तेल उत्पादन की अनुमति तभी मिलेगी, जब वह अमेरिका की इन सभी शर्तों को स्वीकार करेगा. फिलहाल व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन हालात को देखते हुए यह स्पष्ट है कि अमेरिका वेनेजुएला की कमजोर स्थिति का रणनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है.
तेल नीति को अपने हिसाब से मोड़ने की कोशिश
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है जब निकोलस मादुरो को अमेरिकी विशेष बलों ने गिरफ्तार कर लिया है. इसके साथ ही डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति घोषित किया गया. जानकारी के मुताबिक, इस सत्ता परिवर्तन के साथ ही अमेरिका ने वेनेजुएला की विदेश नीति और तेल नीति को अपने हिसाब से मोड़ने की कोशिश तेज कर दी है.
इन देशों के काफी पुराने रिश्ते
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वेनेजुएला को लंबे समय से चीन से निवेश और तकनीक, रूस से सैन्य और सुरक्षा सहयोग, ईरान और क्यूबा से वैचारिक व रणनीतिक समर्थन हासिल है. मानाजा रहा है कि अचानक इन रिश्तों को तोड़ना वेनेजुएला की विदेश नीति में ऐतिहासिक यू-टर्न होगा और इसका असर लैटिन अमेरिका से लेकर एशिया तक दिख सकता है.
तेल कंपनियों को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान
इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा करते हुए कहा कि वेनेजुएला अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल तेल भेजेगा. इतना ही नही बल्कि मौजूदा बाजार कीमत पर इसकी कीमत करीब 2.8 अरब डॉलर तक हो सकती है. उन्होंने ये भी कहा कि ‘यह तेल बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा और इससे होने वाली आय दोनों देशों के लाभ के लिए इस्तेमाल होगी.’ इसे लेकर उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि प्रशासन अगले सप्ताह अमेरिकी तेल कंपनियों के साथ वेनेजुएला में निवेश को लेकर चर्चा करेगा.
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