Geneva: अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से खुद को अलग कर लिया है. इसी बीच अमेरिकी फैसले पर WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अमेरिका द्वारा बताए गए कारण तथ्यों को गलत बताया है. अमेरिका ने WHO पर COVID-19 महामारी के दौरान विफलता, जानकारी छिपाने और गलत मार्गदर्शन देने का आरोप लगाया था.
मास्क, वैक्सीन और सामाजिक दूरी की सलाह
इस पर डॉ. टेड्रोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि WHO ने महामारी के दौरान तेज़ी और पारदर्शिता से जानकारी साझा की. मास्क, वैक्सीन और सामाजिक दूरी की सलाह दी गई लेकिन लॉकडाउन या वैक्सीन अनिवार्यता की सिफारिश कभी नहीं की, अंतिम फैसले सरकारों पर छोड़े गए. WHO ने माना कि किसी भी संगठन से कुछ गलतियां हो सकती हैं लेकिन उसने महामारी से निपटने में अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाई.
WHO का संस्थापक सदस्य रहा है US
डॉ. टेड्रोस ने कहा कि अमेरिका WHO का संस्थापक सदस्य रहा है और संगठन की कई ऐतिहासिक उपलब्धियों में उसकी अहम भूमिका रही है. इनमें चेचक का उन्मूलन, पोलियो, HIV, इबोला, इन्फ्लुएंजा, टीबी, मलेरिया और अन्य गंभीर बीमारियों के खिलाफ लड़ाई शामिल है. WHO प्रमुख ने कहा कि अमेरिका के WHO से हटने से न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया कम सुरक्षित हो जाती है.
US फिर से संगठन में निभाएगा सक्रिय भूमिका
उन्होंने साफ किया कि WHO हमेशा सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करता आया है और अमेरिका के साथ भी यही रवैया रहा है. WHO को उम्मीद है कि भविष्य में अमेरिका फिर से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाएगा. 22 जनवरी को अमेरिका ने औपचारिक रूप से WHO से बाहर निकलने की घोषणा की.
सभी देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा WHO
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और स्वास्थ्य मंत्री केनेडी ने कहा कि आगे WHO से अमेरिका का संपर्क सिर्फ निकासी प्रक्रिया और अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा तक सीमित रहेगा. WHO ने दोहराया कि वह सभी देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा और उसका लक्ष्य है हर इंसान को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना, जो एक मौलिक मानव अधिकार है.
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