भारत के Office Market के लिए प्राइमरी ग्रोथ इंजन बना GCC, 45% हुई लीज में हिस्सेदारी

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Global Capability Centers India 2025: ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स वर्ष 2025 में भारत के ऑफिस मार्केट के सबसे बड़े ग्रोथ ड्राइवर के रूप में सामने आए हैं. कुल ऑफिस स्पेस लीजिंग में उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 45 प्रतिशत हो गई है, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 41% था. सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है.

वेस्टियन की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के दौरान जीसीसी कंपनियों ने करीब 34.9 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया, जो सालाना आधार पर लगभग 20% की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है.

GCC मांग से 2025 में ऑफिस लीजिंग ऑल-टाइम हाई

रिपोर्ट में कहा गया कि जीसीसी की ओर से मजबूत मांग, अनुकूल नीतिगत माहौल और एच1-बी वीजा पर प्रतिबंधों के कारण पूरे भारत में ऑफिस स्पेस की लीज 2025 में बढ़कर ऑल-टाइम हाई 78.2 मिलियन स्क्वायर फीट पर पहुंच गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर जारी व्यापक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद, कुल मांग में सालाना आधार पर 11% की वृद्धि दर्ज की गई, जो भारत के ऑफिस बाजार की मजबूती को दिखाता है.

ऑफिस लीजिंग में आईटी सेक्टर शीर्ष पर, GCC की मजबूत भूमिका

ऑफिस स्पेस लीजिंग के मामले में आईटी सेक्टर लगातार पहले स्थान पर बना हुआ है, जहां कुल लीज में इसकी हिस्सेदारी 38% दर्ज की गई. वहीं, बीएफएसआई और फ्लेक्स स्पेस सेगमेंट की हिस्सेदारी 14-14% रही. इससे साफ होता है कि ऑफिस स्पेस की मांग अब कई सेक्टरों में फैल रही है और बाजार में विविधता बढ़ रही है.

साल 2025 में आईटी-आईटीईएस सेक्टर में ऑफिस स्पेस लीज पर लेने वाली आधे से ज्यादा कंपनियां ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स से जुड़ी रहीं. वहीं, मूल्य के आधार पर देखें तो आईटी-आईटीईएस सेक्टर द्वारा लिए गए कुल ऑफिस क्षेत्रफल में लगभग 60% योगदान जीसीसी कंपनियों का रहा, जो ऑफिस मार्केट के विस्तार में उनकी अहम भूमिका को दर्शाता है.

जीसीसी लीजिंग में बेंगलुरु आगे

2025 में GCC कंपनियों द्वारा लीज पर लिए गए कुल क्षेत्रफल में बेंगलुरु 32% की हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर था. इसके बाद हैदराबाद 19% के बाद दूसरे स्थान पर था. रिपोर्ट के अनुसार, ऑफिस स्पेस की मांग में लगातार तेजी बनी हुई है और मौजूदा रफ्तार को देखते हुए इसके 2026 के अंत तक 85 से 90 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंचने की संभावना है. इस अनुमानित वृद्धि के पीछे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स से आने वाली मजबूत और निरंतर मांग को प्रमुख कारण बताया गया है.

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