सिगरेट की लत बना रही दिमाग को कमजोर, याददाश्त पर पड़ रहा बुरा असर; डॉक्टरों की चेतावनी

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Smoking Health Risk: भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में कई लोग मानसिक दबाव कम करने के लिए सिगरेट का सहारा लेते हैं. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि धूम्रपान वास्तव में तनाव कम नहीं करता, बल्कि निकोटिन की लत के कारण केवल अस्थायी राहत का भ्रम पैदा करता है.

विशेषज्ञों के अनुसार अगर व्यक्ति तनाव के समय धूम्रपान से दूरी बनाए रखे, तो उसका शरीर और दिमाग खुद को बेहतर तरीके से संभालने और तनाव से लड़ने के लिए अधिक मजबूत बन सकता है.

सिगरेट छोड़ते ही क्यों बढ़ती है बेचैनी

डॉक्टरों के मुताबिक सिगरेट पीने से मिलने वाली राहत असल में निकोटिन की कमी से होने वाली बेचैनी को कुछ समय के लिए दबा देती है. जब शरीर में निकोटिन का स्तर कम होता है, तो व्यक्ति चिड़चिड़ापन, घबराहट और बेचैनी महसूस करता है. सिगरेट पीने के बाद ये लक्षण थोड़ी देर के लिए कम हो जाते हैं, जिससे व्यक्ति को लगता है कि उसे मानसिक शांति मिल रही है. हालांकि वास्तविकता यह है कि निकोटिन दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालता है.

फोकस बढ़ने का दावा भी एक भ्रम

कई लोग मानते हैं कि सिगरेट पीने से एकाग्रता और फोकस बढ़ता है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह भी एक गलत धारणा है. निकोटिन थोड़े समय के लिए दिमाग को उत्तेजित कर सकता है, जिससे व्यक्ति खुद को ज्यादा सतर्क महसूस करता है. लेकिन लंबे समय तक धूम्रपान करने से दिमाग की कार्यक्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता है. इससे याददाश्त कमजोर हो सकती है और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

धूम्रपान करने वालों में ज्यादा पाया जाता है तनाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार धूम्रपान करने वाले लोगों में तनाव और चिंता का स्तर गैर-धूम्रपान करने वालों की तुलना में अधिक होता है. निकोटिन की लत एक ऐसा चक्र बना देती है जिसमें निकोटिन की कमी से बेचैनी बढ़ती है और सिगरेट पीने से वह थोड़ी देर के लिए कम हो जाती है. इसी कारण व्यक्ति बार-बार धूम्रपान करने लगता है.

युवाओं में तेजी से बढ़ रहा सिगरेट और वेपिंग का चलन

जागरूकता बढ़ने के बावजूद युवाओं में सिगरेट और वेपिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है. इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं. दोस्तों का दबाव, इंटरनेट मीडिया और फिल्मों का प्रभाव, आकर्षक पैकेजिंग और मार्केटिंग, वेपिंग को कम हानिकारक समझने की गलत धारणा, जिज्ञासा और खुद को परिपक्व दिखाने की चाह जैसे कारण युवाओं को धूम्रपान की ओर आकर्षित करते हैं.

धूम्रपान से बढ़ता है कई गंभीर बीमारियों का खतरा

डॉक्टरों के अनुसार तंबाकू के धुएं में हजारों हानिकारक रसायन होते हैं, जिनमें कई कैंसर पैदा करने वाले तत्व भी शामिल होते हैं. धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर, मुंह और गले का कैंसर, भोजन नली का कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, एम्फायसेमा और सीओपीडी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ये बीमारियां धीरे-धीरे विकसित होती हैं और इसी कारण धूम्रपान को एक साइलेंट हेल्थ क्राइसिस माना जाता है.

जागरूकता और सख्त नियम जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू सेवन को कम करने के लिए जमीनी स्तर पर सख्त नियमों का पालन, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध का प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक जन-जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं. जिम्स की जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. पायल जैन के अनुसार लगभग 20 से 30 प्रतिशत मरीज सीधे या परोक्ष रूप से तंबाकू और धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित होते हैं.

डॉक्टरों की सलाह

यथार्थ हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा वेस्ट के पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. पुनीत गुप्ता का कहना है कि धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों में लगातार खांसी, सांस फूलना, सीओपीडी, हृदय रोग, मुंह के घाव और कैंसर के शुरुआती लक्षण तक शामिल हो सकते हैं. उनका कहना है कि तंबाकू और धूम्रपान से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता और समय रहते इसे छोड़ने का प्रयास है.

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