लोन बनाम डिपॉजिट में बढ़ा अंतर, HDFC बैंक के सामने चुनौती; 18 अप्रैल को होगी बोर्ड की बैठक

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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HDFC Bank Results: देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल HDFC बैंक (HDFC Bank) के मार्च तिमाही के बिजनेस अपडेट ने एक दिलचस्प लेकिन चिंताजनक तस्वीर पेश की है. पहली नजर में बैंक की ग्रोथ मजबूत दिखती है, क्योंकि लोन बुक तेजी से बढ़ी है, लेकिन गहराई से देखने पर साफ होता है कि यह ग्रोथ पूरी तरह संतुलित नहीं है. दरअसल, बैंक के लोन (कर्ज) और डिपॉजिट (जमा) के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है. यह असंतुलन बैंक के लिए भविष्य में लिक्विडिटी और फंडिंग से जुड़ी चुनौतियां खड़ी कर सकता है.

लोन ग्रोथ में तेजी

एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, 31 मार्च तक बैंक का कुल ग्रॉस एडवांस (लोन) सालाना आधार पर करीब 17 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि के साथ लगभग 25 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. यह पिछले साल के करीब 21.4 लाख करोड़ रुपए के मुकाबले बड़ा उछाल है. इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा योगदान रिटेल सेगमेंट का रहा है, जिसमें होम लोन, पर्सनल लोन, ऑटो लोन जैसे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ी है.

इसके अलावा, छोटे और मझोले उद्योग यानी SME सेक्टर में भी कर्ज की मांग में सुधार देखा गया है. हालांकि बैंक ने कॉरपोरेट लोनिंग में ज्यादा आक्रामक रुख नहीं अपनाया, बल्कि संतुलित रणनीति के साथ आगे बढ़ा, जिससे जोखिम को नियंत्रित रखा जा सके.

डिपॉजिट ग्रोथ धीमी: बढ़ता अंतर बना चिंता

जहां लोन तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं डिपॉजिट उसी गति से नहीं बढ़ पा रहे हैं. बैंक के कुल डिपॉजिट करीब 23.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचे, जो पिछले साल 20.5 लाख करोड़ रुपए थे. यह वृद्धि सकारात्मक जरूर है, लेकिन लोन ग्रोथ की तुलना में धीमी है. इसी कारण बैंक का क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो करीब 106-108% के उच्च स्तर पर बना हुआ है.

यह संकेत देता है कि बैंक जितना पैसा जमा कर रहा है, उससे अधिक कर्ज दे रहा है. ऐसी स्थिति में बैंक को अतिरिक्त फंडिंग के लिए महंगे स्रोतों का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे मार्जिन पर दबाव आ सकता है.

CASA पर दबाव: सस्ते फंड जुटाने में बढ़ी मुश्किल

बैंक के लिए एक और बड़ी चुनौती CASA (करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट) डिपॉजिट में गिरावट है. CASA रेशियो घटकर करीब 37-38 प्रतिशत रह गया है, जबकि पिछली तिमाही में यह 38-39 प्रतिशत था. CASA डिपॉजिट कम लागत वाले फंड का प्रमुख स्रोत होते हैं, इसलिए इनमें गिरावट बैंक की फंडिंग लागत को बढ़ा सकती है. मौजूदा समय में लिक्विडिटी का माहौल कड़ा बना हुआ है, जिससे सस्ते डिपॉजिट जुटाना और मुश्किल हो गया है.

18 अप्रैल पर नजर: नतीजे और डिविडेंड की घोषणा

HDFC बैंक ने पहले ही जानकारी दी है कि उसका बोर्ड 18 अप्रैल को बैठक करेगा. इस बैठक में मार्च तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के ऑडिटेड नतीजों को मंजूरी दी जाएगी. इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2026 के लिए डिविडेंड पर भी विचार किया जाएगा और रिकॉर्ड डेट तय की जाएगी. निवेशकों और बाजार की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है.

आगे की रणनीति: संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती

विश्लेषकों का मानना है कि बैंक के लिए अब सबसे अहम प्राथमिकता डिपॉजिट ग्रोथ को तेज करना होगी. अगर बैंक को अपनी लोन ग्रोथ को बनाए रखना है, तो उसे अपने डिपॉजिट बेस को भी मजबूत करना होगा. इसके अलावा CASA बढ़ाना और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को स्थिर रखना भी जरूरी होगा.

गवर्नेंस पर फोकस: कानूनी कार्रवाई नहीं

सूत्रों के अनुसार, बैंक ने मार्च में इस्तीफा देने वाले पूर्व नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना नहीं बनाई है. इसके बजाय बैंक अपने आंतरिक सिस्टम को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है, खासकर थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स की बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए.

AT-1 बॉन्ड केस: सख्त कदम से दिया संदेश

2018-19 में AT-1 बॉन्ड की गलत बिक्री (मिस-सेलिंग) के मामले में बैंक पहले ही सख्त कार्रवाई कर चुका है. इस मामले में तीन वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है, जबकि 12 अन्य कर्मचारियों पर जुर्माना लगाया गया है. यह कदम बैंक की गवर्नेंस सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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