सोने की ऊंची कीमतों के बीच भी बढ़ सकती है गोल्ड ज्वेलरी बाजार की कमाई, रिपोर्ट में बड़ा दावा

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Gold Jewellery Market: देश में लगातार बढ़ रही सोने की कीमतों का असर अब ज्वेलरी बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है. एक तरफ सोने की ऊंची कीमतों ने ग्राहकों की खरीदारी क्षमता पर दबाव बढ़ाया है, तो दूसरी तरफ सरकार द्वारा आयात कम करने के लिए उठाए गए कदम भी बाजार की दिशा बदलते नजर आ रहे हैं. हालांकि इन चुनौतियों के बीच संगठित गोल्ड ज्वेलरी बाजार के लिए एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, बिक्री की मात्रा घटने के बावजूद इस वित्त वर्ष में संगठित गोल्ड ज्वेलरी बाजार की आय में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.क्रिसिल की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, FY26-27 में संगठित गोल्ड ज्वेलरी बाजार की आय सालाना आधार पर 20 से 25% तक बढ़ सकती है. हालांकि यह बढ़ोतरी बिक्री की मात्रा बढ़ने की वजह से नहीं बल्कि सोने की ऊंची कीमतों के कारण होने की संभावना जताई गई है.

सोने की कीमतें बढ़ने से क्यों बदल रही है बाजार की चाल?

रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण ज्वेलरी कारोबारियों की इन्वेंट्री यानी स्टॉक रखने की लागत बढ़ेगी. इसके साथ ही बैंकों से अधिक उधार लेने की जरूरत भी पड़ सकती है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आय और मजबूत नकदी प्रवाह के कारण कंपनियों की वित्तीय स्थिति संतुलित बनी रह सकती है और उनके क्रेडिट प्रोफाइल पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा.

बिक्री की मात्रा में आ सकती है बड़ी गिरावट

सोने की बढ़ती कीमतों और सरकार के हालिया फैसलों का असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी पड़ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, संगठित गोल्ड ज्वेलरी खुदरा क्षेत्र की बिक्री मात्रा में इस वित्त वर्ष 13 से 15% तक गिरावट आने की आशंका है. पिछले वित्त वर्ष में भी बिक्री की मात्रा में लगभग 8% की गिरावट दर्ज की गई थी और अब यह गिरावट और बढ़ सकती है. यदि ऐसा होता है, तो कोविड-19 प्रभावित वित्त वर्ष 2021 को छोड़कर यह पिछले एक दशक में सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा सकता है.

सरकार ने क्यों बढ़ाया सीमा शुल्क?

वित्त वर्ष 2026 में भारत ने लगभग 720 टन सोने का आयात किया था, जिससे देश से करीब 72 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बाहर गई थी. इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने हाल ही में सोने पर सीमा शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है. सरकार का उद्देश्य सोने की मांग को नियंत्रित करना और आयात कम करना है ताकि व्यापार घाटे को कम किया जा सके और भारतीय मुद्रा को सहारा मिल सके.

क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक हिमांक शर्मा ने कहा, “केंद्र सरकार द्वारा सोने पर सीमा शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का निर्णय सोने के आभूषणों की मांग पर काफी नकारात्मक प्रभाव डालेगा. हालांकि निवेश की मांग के कारण सोने की छड़ों और सिक्कों की ओर मजबूत रुझान देखा जा रहा है, लेकिन इससे समग्र मांग में आई गिरावट की पूरी तरह भरपाई होने की संभावना नहीं है.” उन्होंने यह भी कहा कि इस वित्त वर्ष में गोल्ड ज्वेलरी बाजार की बिक्री मात्रा घटकर 620 से 640 टन तक रह सकती है.

ग्राहकों को मिल सकती हैं ज्यादा छूट

रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती कीमतों की वजह से खुदरा विक्रेताओं को इन्वेंट्री से फायदा मिल सकता है, लेकिन इनमें से कुछ लाभ ग्राहकों को अतिरिक्त छूट के रूप में दिए जा सकते हैं ताकि बिक्री को बढ़ावा मिल सके. हालांकि प्रचार खर्च में बढ़ोतरी और सोने की छड़ एवं सिक्कों की बिक्री बढ़ने से खुदरा कारोबारियों के लाभ मार्जिन पर दबाव भी पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सरकारी नीतियों में बदलाव और ग्राहकों की खरीदारी की मानसिकता बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी.

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