Home Loan EMI Bounce: एक ईएमआई मिस होने पर क्या बैंक जब्त कर लेगा आपका घर? जानिए सच और बचाव के तरीके

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Home Loan EMI Bounce: घर खरीदना अधिकांश लोगों का सपना होता है और इस सपने को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग होम लोन का सहारा लेते हैं. लेकिन होम लोन के साथ हर महीने समय पर EMI चुकाने की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है. ऐसे में कई बार नौकरी जाने, आय में कमी आने या किसी अचानक वित्तीय संकट की वजह से लोग समय पर EMI नहीं भर पाते. ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अगर होम लोन की एक EMI छूट जाए तो क्या बैंक तुरंत कोई सख्त कार्रवाई कर सकता है?

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि एक EMI छूटने से आमतौर पर रातों-रात कोई बड़ा संकट खड़ा नहीं होता, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर समस्याओं की वजह बन सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि EMI मिस होने के बाद उधार लेने वाला कितनी जल्दी स्थिति को संभालने की कोशिश करता है.

EMI न भर पाने पर सबसे पहले क्या होता है?

जब होम लोन की EMI समय पर जमा नहीं होती है तो बैंक या वित्तीय संस्था सबसे पहले लेट पेमेंट चार्ज या पेनल्टी ब्याज लगाती है. इसके बाद ग्राहक को भुगतान की याद दिलाने के लिए कॉल, SMS और ईमेल भेजे जा सकते हैं. यदि देरी कुछ समय तक जारी रहती है तो बैंक की कलेक्शन टीम भी ग्राहक से संपर्क करना शुरू कर सकती है. इस दौरान बैंक का मुख्य उद्देश्य बकाया राशि की वसूली करना और भुगतान की स्थिति को समझना होता है.

क्रेडिट स्कोर पर पड़ सकता है असर

होम लोन की EMI बार-बार या लंबे समय तक नहीं भरने पर इसकी जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को भेजी जा सकती है. इससे ग्राहक के सिबिल स्कोर और अन्य क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. क्रेडिट स्कोर खराब होने का असर भविष्य में किसी नए लोन, क्रेडिट कार्ड या अन्य वित्तीय सुविधाओं को प्राप्त करने पर पड़ सकता है. कई बैंक और वित्तीय संस्थाएं लोन मंजूरी देते समय सबसे पहले आवेदक का क्रेडिट इतिहास देखती हैं.

डर या शर्म की वजह से न करें देरी

अक्सर देखा जाता है कि EMI छूटने के बाद कई लोग बैंक से बात करने से बचते हैं. उन्हें लगता है कि समस्या अपने आप ठीक हो जाएगी या बैंक से संपर्क करने पर स्थिति और खराब हो जाएगी. लेकिन वास्तव में यही गलती आगे चलकर बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है. यदि किसी कारणवश EMI चुकाने में दिक्कत आ रही है तो बैंक या लोन प्रदाता से जल्द से जल्द संपर्क करना बेहतर माना जाता है. कई मामलों में बैंक ग्राहकों को अस्थायी राहत या भुगतान से जुड़े विकल्प भी उपलब्ध करा सकते हैं.

महंगे कर्ज के जाल में फंसने से बचें

होम लोन की EMI चुकाने के लिए कई लोग जल्दबाजी में पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का सहारा ले लेते हैं. हालांकि यह फैसला भविष्य में आर्थिक दबाव को और बढ़ा सकता है. उच्च ब्याज दर वाले पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड के जरिए EMI भरना अस्थायी समाधान तो हो सकता है, लेकिन यदि आय और कैश फ्लो की मूल समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बाद में कर्ज का बोझ और अधिक बढ़ सकता है.

अस्थायी या स्थायी समस्या, पहचानना है जरूरी

किसी भी वित्तीय संकट में सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि समस्या अस्थायी है या लंबे समय तक रहने वाली है. यदि आय में कमी या नकदी की दिक्कत कुछ समय के लिए है तो खर्चों में कटौती और बेहतर बजट प्रबंधन से स्थिति संभाली जा सकती है. वहीं यदि आय लगातार अस्थिर बनी हुई है या आर्थिक दबाव लंबे समय तक रहने की आशंका है तो खर्चों और कर्ज से जुड़ी देनदारियों की दोबारा समीक्षा करना जरूरी हो सकता है. समय रहते सही फैसला लेने से भविष्य में बड़े वित्तीय संकट से बचा जा सकता है.

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