Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रभु का दास कभी उदास नहीं होता। प्रभु का भक्त न सुख में छलकता है, न दुःख में कुम्हलाता है। साधु का समय बहुत मूल्यवान होता है। जिसने अपने जीवन में अन्न के कण और समय के क्षण को महत्व दिया, उसी को शास्त्रों ने विचक्षण माना है, विशेष समझदार कहा है। एक आदमी ने किसी से सुन लिया कि समय बहुत मूल्यवान है।
वह घूम-घूम कर आवाज लगाने लगा, कोई मेरा समय खरीद लो और मुझे उसके बदले में धन दे दो। किसी ने कहा तुम जैसे अकर्मण्य का समय कौड़ी बराबर भी नहीं है। समय मूल्यवान उसका है जो नित्य सद्कार्यों में लगा हुआ है। जो क्षण और कण को बचाने की कला जानता है, वही सन्त है। अपनी इच्छा या बुद्धि से नहीं, संत के निर्देशानुसार सत्कर्म करो। जो पुत्र प्राप्त होने पर भी आनन्दित है न प्राप्त होने पर भी आनन्दित है, वही भक्त है।
हृदय को भगवां करने वाला ही सच्चा परहंस है। मनुष्य जीवन में साधुता के गुण उतरने पर ही संत बना जा सकता है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।