जिसके जीवन में भौतिक कामना न हो उसे ही मिलती है सच्ची भक्ति: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthanपरम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्रीराम राज्याभिषेक की तैयारी, रामराज्य रसभंग,  लक्ष्मण गीता, केवट प्रसंग और भरत चरित की कथा का वर्णन किया गया।
सबके उर अभिलाष अस कहहिं मनाइ महेश।
आपु अक्षत जुवराज पद 
रामहिं देहिं नरेश।।
भगवान श्री राम विवाह करके अयोध्या आए उसके 11 वर्ष बाद की बात है। अयोध्या में सबकी इच्छा है कि महाराज दशरथ श्री सीताराम जी का राज्याभिषेक कर दें। श्री सीताराम जी राज्य गादी पर विराजमान हो जाएँ, एक बार हम सब प्रभु की आरती उतार लें  तो हमारा जीवन सफल हो गया, जो कुछ करना था कर चुके। सभी लोग इसके लिए महाराज दशरथ से प्रार्थना कर रहे थे और भगवान शंकर की उपासना कर रहे थे। लेकिन भगवान की पूर्व से लीला निश्चित थी।
भगवान को अधर्म का नाश करना था, धर्म की स्थापना करना था। भगवान को बन लीला करना था।वन पधारना था, इसलिए प्रभु ने स्वयं ही राज्य रसभंग की लीला करवाया और वन पधारे। लक्ष्मण गीता में श्री लक्ष्मण जी महाराज ने निषादराज को उपदेश देते हुए कहा-
काहू न कोउ सुख दुःख कर दाता।
निज कृत कर्म भोग सब भ्राता।।
इस संसार में कोई किसी को सुख नहीं दे रहा है और कोई किसी को दुःख भी नहीं दे रहा है, पूर्व में किए गये हमारे अच्छे बुरे कर्म ही हमको सुख-दुःख दे रहे हैं।
कर्म किए को भोग है, सब काहू को होय।
ज्ञानी काटे ज्ञान से, मूरख काटे रोय।।
केवट प्रसंग में भक्ति को भगवान के खजाने का सबसे कीमती रत्न बताया। भक्ति उसे मिलती है जिसके जीवन में भौतिक कामना न हो। संसार भगवान की आराधना उपासना तो करें, लेकिन बदले में कुछ न चाहे, जिसे निष्काम भक्ति कहते हैं. भरत चरित में ईश्वर प्राप्ति  के मार्ग में आने वाली बाधाओं का वर्णन किया। जब हम ईश्वर की प्राप्ति की तरफ चलते हैं तो पहली बाधा आती है कि हमारा नियम टूट जाता है। दूसरी बाधा भगवान के भक्तों के द्वारा हमारा विरोध होता है।
 तीसरी बाधा थोड़ी सी भक्ति पर अपार सपत्ति मिल जाती है, कई लोग भक्ति छोड़ देते हैं। वह भी ईश्वर तक नहीं पहुंच पाये, चौथी बाधा देवताओं की तरफ से की जाती है और पांचवी बाधा परिवार के लोग ही भक्ति का विरोध करने लगते हैं। और जब आपकी उपासना आराधना का विरोध होने लगे हैं तो समझना चाहिए मंजिल बहुत करीब है।
अब हम बड़ी आसानी से प्रभु की प्राप्ति करने वाले हैं। भक्ति मार्ग में जब व्यक्ति चले तो घबराना नहीं चाहिए। भगवान पर भरोसा करके आगे बढ़ते रहना चाहिए। एक न एक दिन वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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