सच्चे कर्मों से ही मिलता है जीवन में सुख और शांति: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Shivam
Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, धर्मशास्त्रों में कर्म तीन प्रकार के बताये गये हैं। तीनों प्रकार के कर्मों से जब जीव को छुटकारा मिल जाता है तो वह मुक्त हो जाता है। मुक्त होने का अर्थ है, भगवत् चरणों की प्राप्ति, आवागमन के चक्कर से छुटकारा और मानव जीवन की सफलता।

क्रियमाण कर्म कहते हैं जो वर्तमान में हम कर रहे हैं। संचित कर्म कहते हैं जो पहले हम कर चुके हैं और प्रारब्ध कर्म उसे कहते हैं जो हमारे कर्म फल देना शुरू कर दिए हैं, जिन हमारे कर्मों का फल आज हमको मिल रहा है उसी को प्रारब्ध कर्म और भाग्य भी कहते हैं। इस संसार में कोई किसी को सुख अथवा दुःख नहीं दे रहा है। उसके अच्छे बुरे कर्म ही उसे सुख और दुःख प्रदान कर रहे हैं। श्री रामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड में निषादराज को उपदेश देते हुए श्री लक्ष्मण जी कहते हैं-

काहू न कोउ सुख-दुःख कर दाता।
निजकृत करम भोग सब भ्राता।।
संतों ने भी अपनी वाणी में कहा है-
करम किये को भोग है, सबकाहू को होय।
ज्ञानी काटे ज्ञान से मूरख काटे रोय।।
सम्पत्ति, सन्तति और सांसारिक सुख तो पूर्वसंचित प्रारब्ध के अनुसार ही मिलते हैं। आपके जीवन की फिल्म तो जन्म से पहले ही निश्चित हो गई है। उसे साक्षी भाव से देखोगे तो सुखी रहोगे। कर्ता भाव रखोगे तो दुःख उठाओगे। तुम्हें कितने पैसे मिलने वाले हैं – यह प्रभु ने पहले ही निश्चित कर दिया है।
तुम्हारे भाग्य का पैसा कोई दूसरा नहीं ले जा सकता, और दूसरे के भाग्य का पैसा तुम्हें मिलने वाला नहीं है। तुम्हारी चिन्ता प्रभु को ज्यादा है, इसलिए जन्म के पहले ही तुम्हारी सब व्यवस्था तैयार करके रखते हैं।सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
Latest News

18 October 2026 Ka Panchang: रविवार का पंचांग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

19 अक्टूबर 2026, सोमवार को आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि सुबह 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. इसके...

More Articles Like This