Crude Oil Price: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़े सैन्य तनाव का असर अब ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर साफ दिखाई देने लगा है. दोनों देशों के बीच नए हमलों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है. इससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश की चिंता भी बढ़ गई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है.
फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत 96.28 डॉलर प्रति बैरल और US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 91.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है. हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को ब्रेंट फ्यूचर्स में 76 सेंट यानी 0.8% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि WTI में 18 सेंट यानी 0.2% की तेजी आई. पूरे सप्ताह की बात करें तो ब्रेंट क्रूड करीब 7.6% और WTI लगभग 10% चढ़ा है. यह जुलाई के मध्य के बाद दोनों बेंचमार्क की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त है.
अमेरिका-ईरान संघर्ष से क्यों बढ़ी तेल की कीमत?
कच्चे तेल की कीमतों में आया यह उछाल अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू हुई सैन्य झड़पों के बाद देखने को मिला है. US सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों, जिनमें एयरक्राफ्ट कैरियर और डिस्ट्रॉयर शामिल हैं, पर हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के जवाब में बड़ी कार्रवाई की गई. इस कार्रवाई में ईरान के तीन क्रूड ऑयल टैंकरों को निशाना बनाया गया है. मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव ने तेल की सप्लाई को लेकर बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है. निवेशक इस बात को लेकर सतर्क हैं कि अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो दुनिया की महत्वपूर्ण तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा संकट
मौजूदा तनाव में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम बिंदु बन गया है. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी शिपिंग रूट में शामिल है. यहां से वैश्विक कच्चे तेल की कुल आपूर्ति का करीब 20 से 25% हिस्सा गुजरता है. क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद मर्चेंट और कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. इसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है और वैश्विक तेल डिलीवरी चेन पर भी इसका असर पड़ने लगा है. इसके अलावा, इस रूट से गुजरने वाले जहाजों के लिए ‘वॉर-रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम’ यानी युद्ध-जोखिम बीमा की लागत और माल ढुलाई की दरें कई गुना बढ़ गई हैं. इससे कच्चे तेल की लैंडिंग कॉस्ट भी काफी महंगी हो रही है.
सितंबर की शुरुआत से ही चढ़ रहा है कच्चा तेल
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी अचानक नहीं आई है. इस हफ्ते की शुरुआत में ही दोनों प्रमुख बेंचमार्क छह हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए थे. 3 सितंबर को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 97.29 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी, जबकि WTI बढ़कर लगभग 93.04 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया था. उस समय भी अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए नए हमलों और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी थी. अब नए सैन्य घटनाक्रमों के बाद बाजार में यह आशंका और मजबूत हो गई है कि तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
क्या भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए भी चिंता का विषय है. सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने फिलहाल 6 सितंबर 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. यानी आज आम लोगों को पेट्रोल-डीजल के दाम में तत्काल कोई बढ़ोतरी नहीं मिली है. हालांकि, अगर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लंबा खिंचता है और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर जाता है, तो आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का दबाव बन सकता है. भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश को कच्चे तेल के आयात के लिए ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ेगी. इसका असर आगे चलकर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है.
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