National Nutrition Week 2026: संपूर्ण पोषण के लिए डाइट में शामिल करें ये 6 औषधीय पौधे, आयुष मंत्रालय ने बताई खूबियां

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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National Nutrition Week 2026: हर साल 1 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है. इसका उद्देश्य लोगों को संतुलित आहार और बेहतर पोषण के प्रति जागरूक करना है. इसी कड़ी में आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पौधे बोर्ड ने संपूर्ण पोषण के लिए 6 पौष्टिक औषधीय पौधों को रोजाना की डाइट का हिस्सा बनाने की सलाह दी है. बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इन पौधों की जानकारी साझा की. इसमें शतावरी, मोरिंगा, आंवला, ब्राह्मी, गिलोय और तुलसी को शामिल किया गया है. बोर्ड के मुताबिक, इन पौधों में मौजूद पोषक तत्व रोजाना के आहार को बेहतर बनाने में योगदान दे सकते हैं.

शतावरी

शतावरी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से महिलाओं की सेहत और ऊर्जा के लिए किया जाता रहा है. इसे ताकत और सामान्य स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए उपयोगी माना जाता है. इसके अलावा, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसे पाचन के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है.

मोरिंगा

मोरिंगा यानी सहजन की पत्तियां कई पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं. इनमें प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं. पारंपरिक रूप से मोरिंगा का इस्तेमाल ऊर्जा और सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है.

आंवला

आंवला विटामिन C और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत माना जाता है. इसका पारंपरिक रूप से पाचन और सामान्य स्वास्थ्य के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली को सपोर्ट करने में योगदान दे सकते हैं.

ब्राह्मी

ब्राह्मी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता को बेहतर बनाए रखने के लिए किया जाता है. इसे तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को सपोर्ट करने वाली औषधीय जड़ी-बूटी के तौर पर भी जाना जाता है. पारंपरिक चिकित्सा में इसे मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम के लिए उपयोगी माना जाता है.

गिलोय

गिलोय का पारंपरिक रूप से प्रतिरक्षा और सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसे मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है. आयुर्वेद में गिलोय को त्रिदोष शामक बताया गया है, यानी इसे वात, पित्त और कफ के संतुलन से जोड़ा जाता है.

तुलसी

तुलसी भारतीय घरों में लंबे समय से इस्तेमाल की जाने वाली प्रमुख औषधीय पौधों में से एक है. इसका पारंपरिक रूप से सांस से जुड़ी सेहत के लिए उपयोग किया जाता है. इसके अलावा, तुलसी को शरीर को तनाव से निपटने में मदद करने वाली और सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट करने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है. इसमें प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और एडाप्टोजेनिक गुण बताए जाते हैं.

नोट: इन पौधों के कई उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर आधारित हैं. किसी बीमारी के इलाज या नियमित औषधि के विकल्प के तौर पर इनका इस्तेमाल करने से पहले योग्य डॉक्टर या आयुष विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है.

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