Meningitis Symptoms: मेनिनजाइटिस ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसमें दिमाग और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाली झिल्लियों में सूजन या संक्रमण हो जाता है. यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकती है और कुछ मामलों में स्थिति बहुत तेजी से गंभीर हो सकती है. खासतौर पर बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस को गंभीर स्वास्थ्य समस्या माना जाता है. ऐसे में इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी है.
क्या है मेनिनजाइटिस?
मेनिनजाइटिस दिमाग और रीढ़ की हड्डी के आसपास मौजूद सुरक्षात्मक झिल्लियों में होने वाला संक्रमण या सूजन है. यह बीमारी बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और कुछ परजीवियों के कारण हो सकती है. इनमें बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस सबसे गंभीर रूपों में से एक माना जाता है और इलाज में देरी होने पर स्थिति बिगड़ सकती है.
किन कारणों से होता है मेनिनजाइटिस?
बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस के प्रमुख कारणों में मेनिंगोकोकल, न्यूमोकोकस, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा और ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस जैसे बैक्टीरिया शामिल हैं. किस व्यक्ति में किस रोगजनक से संक्रमण का खतरा ज्यादा होगा, यह उसकी उम्र, रोग प्रतिरोधक क्षमता और संक्रमण के संपर्क समेत कई कारकों पर निर्भर करता है. नवजात शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है. वहीं बच्चों और किशोरों में मेनिंगोकोकल, न्यूमोकोकस और हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं.
तेज बुखार और गर्दन में अकड़न हो तो रहें सावधान
मेनिनजाइटिस के लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है. इसके सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, उल्टी, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता और भ्रम या मानसिक स्थिति में बदलाव शामिल हो सकते हैं. गंभीर स्थिति में मरीज को दौरे पड़ सकते हैं, बेहोशी की स्थिति आ सकती है या हाथ-पैर में कमजोरी महसूस हो सकती है. हालांकि, हर मरीज में सभी लक्षण एक साथ दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है.
बच्चों और शिशुओं में अलग हो सकते हैं लक्षण
छोटे बच्चों और खासकर नवजात शिशुओं में मेनिनजाइटिस के लक्षण सामान्य से अलग दिखाई दे सकते हैं. बच्चा अचानक कम सक्रिय हो सकता है, उसे जगाने में परेशानी हो सकती है या वह लगातार चिड़चिड़ा रह सकता है. इसके अलावा बच्चा ठीक से दूध नहीं पी सकता या लगातार कमजोर आवाज में रो सकता है. कुछ मामलों में सिर के ऊपरी हिस्से का मुलायम स्थान यानी फॉन्टानेल उभरा हुआ भी दिखाई दे सकता है. ऐसे किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
कैसे फैल सकता है संक्रमण?
मेनिनजाइटिस किस तरह फैलेगा, यह उसके कारण पर निर्भर करता है. कई प्रकार के बैक्टीरिया नाक और गले में मौजूद हो सकते हैं और सांस की बूंदों या गले के स्राव के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकते हैं. भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहने और लंबे समय तक किसी संक्रमित व्यक्ति के बेहद करीब रहने से कुछ प्रकार के संक्रमणों के फैलने का जोखिम बढ़ सकता है.
टीकाकरण से कम किया जा सकता है खतरा
मेनिनजाइटिस के कुछ प्रमुख बैक्टीरियल कारणों से बचाव के लिए टीके उपलब्ध हैं. मेनिंगोकोकल, न्यूमोकोकस और हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा के खिलाफ टीकाकरण संक्रमण से सुरक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसके अलावा हाथों की नियमित सफाई रखना भी जरूरी है. संक्रमित व्यक्ति के साथ करीबी संपर्क से बचने के साथ कप, बर्तन और टूथब्रश जैसी व्यक्तिगत चीजें साझा नहीं करनी चाहिए. यदि कोई व्यक्ति मेनिंगोकोकल संक्रमण के करीबी संपर्क में आया है, तो डॉक्टर स्थिति के अनुसार एंटीबायोटिक से बचाव की सलाह दे सकते हैं.
मेनिनजाइटिस में इलाज में देरी पड़ सकती है भारी
मेनिनजाइटिस को मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है. तेज बुखार के साथ गर्दन में अकड़न, तेज सिरदर्द, भ्रम, बार-बार उल्टी, दौरे या तेजी से बिगड़ती हालत जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए. खासकर बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस में इलाज शुरू करने में देरी गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ा सकती है. इसलिए ऐसे लक्षणों को सामान्य बुखार या थकान समझकर घर पर इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.
यह भी पढ़े: DRI का चेन्नई पोर्ट पर बड़ा एक्शन: 12 करोड़ के अवैध चीनी पटाखे जब्त

