प्रमोशन बना यमदूत! काम के दबाव में गई जान, मौत के बाद भी मिला नया टास्क

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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दुनिया भर में वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर भले ही बड़े-बड़े दावे किए जाते हों, लेकिन हकीकत कई बार बेहद भयावह तस्वीर सामने रख देती है. चीन से आया एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने हर नौकरीपेशा व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया है. यहां काम के अत्यधिक दबाव में एक 32 वर्षीय प्रोग्रामर की मौत हो गई, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि उसकी मौत के कई घंटे बाद भी ऑफिस की ओर से उसे नया टास्क सौंप दिया गया.

सुबह तबीयत खराब, फिर भी काम पर बैठे

रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक प्रोग्रामर की पत्नी ने बताया कि घटना वाले दिन उनके पति सुबह जल्दी उठे थे, लेकिन उन्होंने कहा था कि उनकी तबीयत ठीक महसूस नहीं हो रही है. इसके बावजूद उन्होंने यह कहते हुए काम शुरू कर दिया कि कुछ जरूरी टास्क पूरे करने हैं. कुछ ही घंटों में उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई और उन्हें दौरे पड़ने लगे. अस्पताल ले जाते समय वह बेहोश हो गए. डॉक्टरों ने बाद में उन्हें मृत घोषित कर दिया. शुरुआती जांच में मौत का कारण अचानक आया हार्ट अटैक बताया गया है, जिसकी एक बड़ी वजह लंबे समय से चला आ रहा काम का अत्यधिक दबाव माना जा रहा है.

मौत के बाद भी मिला काम

सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया, जब पत्नी ने बताया कि पति की मौत के करीब आठ घंटे बाद ऑफिस की ओर से उन्हें एक नया ईमेल मिला, जिसमें एक और काम सौंपा गया था. बताया गया कि मौत वाले दिन भी वह कंपनी के वर्क सिस्टम में कई बार लॉग-इन हुए थे. यहां तक कि जब उनकी हालत गंभीर थी, तब भी उन्हें काम से जुड़े एक ग्रुप में जोड़ा गया. यह मामला सोशल मीडिया पर सामने आते ही लोगों में गुस्सा और गहरी पीड़ा दोनों देखने को मिली. कई यूजर्स ने इसे एक अमानवीय और संवेदनहीन सिस्टम की भयावह मिसाल बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी.

प्रमोशन बना यमदूत

पत्नी का कहना है कि साल 2021 में जब उनके पति को टीम लीडर के पद पर प्रमोशन मिला, तभी से काम का दबाव असहनीय हो गया. देर रात तक काम करना आम बात हो गई थी. अक्सर वह रात 9:30 बजे के बाद ही घर लौटते थे. पत्नी ने कुछ चैट रिकॉर्ड्स भी साझा किए, जिनमें साफ दिखता है कि उनसे लगातार देर तक काम करने की उम्मीद की जाती थी. उन्होंने बताया कि पति कई बार थकान और खराब तबीयत के बावजूद छुट्टी लेने से मना कर देते थे, क्योंकि उन्हें अपनी टीम और जिम्मेदारियों का बोझ महसूस होता था.

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