अब चांद पर खाना बनाएंगे अंतरिक्ष यात्री, स्पेस पर चने की फसल उगाने में हुए सफल

Farming in space: स्पेस में जीवन के तलाश में वैज्ञानिक लंबे समय से कई तरह की रिसर्च कर रहे हैं और इसमें वैज्ञानिक सफल भी हुए हैं. बता दें कि अब वहां खाने की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है. इसी दिशा में एक बहुत जरूरी प्रयोग में वैज्ञानिकों को सफलता मिली है. एक प्रयोग में वैज्ञानिकों ने चंद्रमा जैसी नकली मिट्टी में चने उगाने में सफलता हासिल की है. जानकारी के मुताबिक, इस रिसर्च ने स्पेस फार्मिंग यानी अंतरिक्ष में खेती की संभावनाओं को नई दिशा दी है.

ऐसे में इसे लेकर रिसर्चर्स ने बताया कि चंद्रमा की सतह जैसी मिट्टी तैयार कर उसमें काबुली चने की माइल्स किस्म उगाने की कोशिश की है. यह किस्म अंतरिक्ष में खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है. इसके साथ ही इस प्रयोग में ऐसे मिश्रण का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें चंद्र धूल जैसे पदार्थ की ज्यादा मात्रा थी.

इसके साथ ही नतीजों में पाया गया है कि 75 प्रतिशत तक इस मिट्टी में भी चने उगाए जा सकते हैं. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार स्पेस फार्मिंग का मतलब अंतरिक्ष या दूसरे ग्रहों पर फसल उगाना है, ताकि वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को ताजा भोजन मिल सके. ऐसे में वैज्ञानिकों का मानना है कि फ्यूचर में चांद या मंगल ग्रह पर बेस बनाने के लिए वहां ही खाने का इंतजाम करना जरूरी होगा. क्योंकि पृथ्वी से हर चीज भेजना महंगा और मुश्किल है.

इसे लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा की मिट्टी नॉर्मल मिट्टी से अलग होती है. इसमें जैविक पदार्थ और बैक्टीरिया नहीं होते हैं, जिनसे पौधों को पोषण मिलते हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने मिट्टी में वर्मीकम्पोस्ट मिलाया, जो कि केंचुओं से बनती है और पोषक तत्वों से भरपूर होती है.

इतना ही नही बल्कि वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में चांद पर मिशन के दौरान वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के लिए स्थानीय स्तर पर भोजन तैयार करना जरूरी होगा. इससे न सिर्फ लागत कम होगी, बल्कि जीवन समर्थन सिस्टम भी बेहतर हो सकेगा. वहीं पौधे ऑक्सीजन देने में भी मदद करेंगे. फिलहाल इन चनों की जांच की जा रही है. ऐसे में वैज्ञानिक यह पता लगा रहे हैं कि इनमें भारी धातुओं का स्तर कितना है और यह खाने के लिए सुरक्षित है या नहीं. इसके साथ ही उनकी पोषण गुणवत्ता पर भी रिसर्च की जा रही है.

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