Delhi Heatwave Crisis: संजय झील बनी मौत का तालाब! लापरवाही या गर्मी ने ली हजारों मछलियों की जान?

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Delhi Heatwave Crisis: राजधानी दिल्ली इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है. लगातार बढ़ता तापमान लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है, लेकिन इस बार गर्मी का असर सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहा. प्रकृति और बेजुबान जीव भी इसकी गंभीर मार झेल रहे हैं. पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार स्थित संजय झील से एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है, जहां पानी की कमी और ऑक्सीजन स्तर गिरने से हजारों मछलियां तड़प-तड़प कर मर गईं. कभी लोगों के लिए सुकून और प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र रही यह झील अब प्रशासनिक लापरवाही और गर्मी के दोहरे संकट की कहानी बयां कर रही है.

संजय झील में दिखा भीषण गर्मी का असर

पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार स्थित संजय झील को यमुनापार के सबसे खूबसूरत पिकनिक स्पॉट्स में गिना जाता है. लेकिन इस समय झील की हालत बेहद खराब हो चुकी है. झील लगभग सूख चुकी है और पानी के घटते स्तर के कारण यहां रहने वाली हजारों मछलियों की मौत हो गई है. गर्मी और जल संकट के चलते पानी में ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से कम हो गई, जिसके कारण बड़ी संख्या में मछलियां जीवित नहीं रह सकीं.

4 महीने से पानी सप्लाई बंद होने का आरोप

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों ने इस मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. जानकारी के अनुसार संजय झील में पानी की नियमित आपूर्ति कोंडली एसटीपी प्लांट के जरिए होती है, जिसकी जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड और DDA के पास है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले लगभग चार महीनों से झील में पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया. इसी दौरान बढ़ती गर्मी ने हालात को और गंभीर बना दिया. बचा हुआ पानी भी तेज गर्मी के कारण धीरे-धीरे सूखता चला गया.

झील के किनारे दफनाई जा रहीं मरी हुई मछलियां

भारत एक्सप्रेस के संवाददाता हिमांशु दुबे ने जब ग्राउंड जीरो (मौके) पर पहुंचकर जायजा लिया, तो तस्वीरें बेहद विचलित करने वाली थीं. पूरे इलाके में इतनी भयंकर बदबू फैली हुई है कि वहां चंद मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल है. कर्मचारी सुबह से झील के किनारे मरी हुई मछलियों को बाहर निकालने में जुटे हैं. हालात को काबू करने और महामारी से बचने के लिए प्रशासन की ओर से वहीं गड्ढे खोदकर मरी हुई मछलियों को दबाया (दफनाया) जा रहा है. वहां मौजूद एक कर्मचारी ने बताया, “गर्मी बहुत ज्यादा है, पानी सूख गया है. हमने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में मछलियों को मरते देखा है.”

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते झील में पर्याप्त पानी छोड़ा गया होता तो हालात इतने गंभीर नहीं बनते. अब यह सवाल उठने लगा है कि राजधानी के इतने महत्वपूर्ण जल स्रोत की देखरेख में आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई. कभी लोगों के लिए सुकून और प्राकृतिक सुंदरता की पहचान रही संजय झील आज सूखे पानी, बदबू और मरी हुई मछलियों के बीच प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां करती दिखाई दे रही है.

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