सत्य की राह पर चलने वाला व्यक्ति परेशान हो सकता है, लेकिन परास्त नहीं: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्रीरामेश्वर स्थापना, श्रीराम सेतु का निर्माण, अंगद रावण संवाद, श्रीराम रावण युद्ध, लंका-विजय, श्रीअयोध्या धाम में श्री रामराज्याभिषेक की कथा का गान किया गया। अपने यहां चार धाम हैं, सात मोक्षदायक पुरी हैं, द्वादश ज्योतिर्लिंग हैं, धर्मशास्त्र कहते हैं जीवन में कम से कम एक बार इनकी यात्रा अवश्य करना चाहिए, उसके बाद नित्य पूजा-पाठ के समय धाम,पुरी और ज्योतिर्लिंग का मानसिक यात्रा पूजन कर लेना चाहिए, ऐसा करने से नित्य धाम दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है और मंगल होता है।
सतयुग का धाम बद्रीनाथ है, त्रेता का धाम श्रीरामेश्वरम् है, द्वापर का धाम श्रीद्वारिका पुरी है और कलियुग का धाम श्रीजगन्नाथ पुरी है। श्रीराम सेतु निर्माण के समय भगवान श्रीराम ने त्रेता युग में श्री रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग की स्थापना अपने हाथों से किये। श्रीरामेश्वरम् यात्रा, भगवान का दर्शन-पूजन करने से भक्तों को भगवान शिव की कृपा तो प्राप्त होती ही है प्रभु श्रीराम की कृपा भी प्राप्त होती है।श्रीरामेश्वर महादेव की यात्रा का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है।
लंका विजय का आध्यात्मिक अभिप्राय है, बुराई पर अच्छाई की विजय। रावण बुराई का प्रतीक है और श्री राम अच्छाई के मूर्तमान स्वरूप है। इसीलिए अपने यहां आज भी दशहरा मनाया जाता है, अपने यहां कहावत है सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता है। भगवान श्रीराम को लंका विजय के लिए संघर्ष बहुत करना पड़ा लेकिन विजय हुई। सत्य पर चलने वाले व्यक्ति को घबराना नहीं चाहिए, विजय सदैव सत्य की होती है। भारतवर्ष का ये दो महान मंत्र है- ” सत्यमेव जयते ” “अहिंसा परमो धर्मः ” इस सिद्धांत पर चलने वाला व्यक्ति परेशान हो सकता है लेकिन परास्त नहीं हो सकता। अगर कोई व्यक्ति शत प्रतिशत सत्य पर चल रहा है तो असत्य की पराजय निश्चित है।
श्री अयोध्या धाम में भगवान् श्रीराम का राज्याभिषेक, श्रीराम-राज्य की महिमा, श्रीकागभुसुण्डी-गरुड़ संवाद के साथ श्रीराम कथा संपन्न हुई। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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