Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्री अयोध्या धाम मृतलोक के तीर्थ में से नहीं है। श्रीनारद पाञ्चरात्र में श्री अयोध्या धाम की महिमा का बड़ा विशाल वर्णन किया गया है। वहां लिखा है कि श्री अयोध्या धाम भगवान श्री राम का दिव्य साकेत लोक है। जहां भगवान श्री सीताराम जी सपरिकर नित्य निवास करते हैं। सूर्यवंश के प्रथम राजा श्री वैवस्वत मनु जी महाराज हुए और इस परम्परा के गुरु श्री गुरुदेव वशिष्ठ हुए। एक बार मनु महाराज को गुरु वशिष्ठ दिव्य श्री साकेत लोक की महिमा सुन रहे थे।
उसमें सुनाया कि साकेत धाम में श्री अयोध्या जी विद्यमान है। जब अयोध्या धाम की महिमा का बहुत वर्णन किया तो श्री वैवस्वत मनु महाराज जी ने गुरु वशिष्ठ से बड़ी प्रार्थना किए कि श्री अयोध्या धाम धरती पर आना चाहिए। कहते हैं मनु महाराज के आग्रह से गुरु वशिष्ठ ने बड़ा कठिन तप किया और अपनी तपस्या के बल से श्री दिव्य साकेत धाम से श्री अयोध्या धाम को मृत्युलोक पर लाकर स्थापित किये। श्री अयोध्या धाम तीन लोक में नहीं है। तीनों लोक से अलग दिव्य साकेत लोक का यह धाम है। प्रलय होने पर भी श्री अयोध्या धाम सत्य और नित्य होने के कारण अपने स्वरूप में स्थित रहता है।
एक बार गुरुदेव श्री वशिष्ठ जी महाराज मनु महाराज को दिव्य श्री साकेत धाम की कथा में सरयू जी की महिमा सुनाये और कहा कि श्री सरयू जी दिव्य साकेत धाम में नित्य हैं। मनु महाराज ने फिर आग्रह किया कि जगत कल्याण के लिए सरयू जी को धरती पर लाइये। पुनः गुरु श्री वशिष्ठ जी ने कठिन तपस्या किया और सरयू जी को धरती पर ले आये।जो श्री सरयू जी मानसरोवर से निकलकर अयोध्या जी से होते हुए जगत का मंगल कर रही हैं।
भगवान श्री राम के दिव्य श्री साकेत धाम की कथा सुनाते हुए गुरु जी ने श्री साकेत धाम में विराजमान श्री रंगनाथ भगवान की कथा सुनाया। श्री रंगनाथ भगवान की खूब महिमा का वर्णन किया। श्री मनु महाराज ने पुनः कहा कि श्री रंगनाथ भगवान को जगत मंगल के लिए धरती पर लाइए। श्री गुरु जी ब्रह्मा जी के पुत्र हैं श्री गुरु वशिष्ट जी ने पुनः कठिन तप किया और श्री रंगनाथ भगवान को धरा धाम पर लाये। श्री रंगनाथ भगवान श्री अयोध्या धाम के कुलदेव के रूप में विराजमान हुए।
निज कुल ईष्ट देव भगवाना। पूजा हेतु कीन्ह स्नाना।।
भगवान श्री राम की लीला पर्यंत श्री रंगनाथ भगवान श्री अयोध्या धाम में विराजमान रहे। विभीषण के आग्रह पर प्रभु श्री राम ने श्री रंगनाथ भगवान को उन्हें प्रदान किया। जिन्हें श्री विभीषण जी लंका लेकर जाना चाहते थे लेकिन भगवान श्री रंगनाथ की इच्छा भारत की तपोभूमि पर ही विराजने की थी। दक्षिण भारत में कावेरी नदी के किनारे श्री रंगनाथ भगवान को विराजमान कर विभीषण जी स्नान संध्या किए। प्रारम्भ में ही शर्त थी जहां रख दोगे, वही मैं रहूंगा। श्री विभीषण जी को भगवत इच्छा से वह शर्त का ध्यान नहीं रहा और भगवान रंगनाथ श्रीरंगम् में विराजमान हो गये।
श्री अयोध्या धाम यात्रा में श्री सरयू जी का स्नान, श्री राम जन्मभूमि का दर्शन, श्री हनुमानगढ़ी का दर्शन, श्री कनक भवन जी का दर्शन अति आवश्यक है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।