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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, देवी दुर्गा माता का छठाँ रूप माता कात्यायनी हैं।माता कात्यायनी की पूजा नवरात्रि के छठें दिन की जाती है। मां का विग्रह स्वर्ण के समय चमकीला है। मां की चार भुजाएं हैं। ऊपर का दाहिना हाथ अभय मुद्रा में और नीचे वाला हाथ वरमुद्रा में है।बायीं भुजा में तलवार और कमल का फूल सुशोभित है। मां का वाहन सिंह है। महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर आदि शक्ति ने पुत्री के रूप में जन्म लिया था।
इसलिए माँ का नाम कात्यायनी पड़ा। नवरात्रि की षष्ठी तिथि को कात्यायनी माँ की पूजा होती है। मां कात्यायनी की कृपा से विवाह में आ रही बधायें दूर होती हैं। धर्म,अर्थ,काम तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। बुद्धि प्राप्ति का अचूक मन्त्र- प्रार्थना, श्रीमद्देवीभागवत में बुद्धि बढ़ाने वाला एक मंत्र है, बहुत बढ़िया मंत्र है, यह पहला ही मंत्र है-
ऊँ सर्व चैतन्य रूपां तामाद्यां विद्यां च धीमहि बुद्धिं यो नः प्रचोदयात्।
जो समग्र चेतनाओं की केन्द्र बिन्दु हैं,जो आदि विद्या हैं, हम सब उनका ध्यान करते हैं, वह हमारी बुद्धि को निर्मल बना दें और परमात्मा की ओर प्रेरित कर दें। जब बार-बार आप मंत्र जपेंगे, तब मंत्र का देवता कभी तो आपकी ओर ध्यान देगा। किसी गली में रामलाल नाम का व्यक्ति रह रहा है। ढूंढने वाला स्वरूप से परिचित नहीं है, पहचानता नहीं है लेकिन नाम जानता है। वह गली में आवाज लगाता जा रहा है, अरे भैया रामलाल! रामलाल जी! नाम सुनते ही रामलाल उठेंगे, झांक कर देखेंगे, अरे! क्या बात है भाई? रामलाल को ढूंढ रहा हूँ। वह कहेंगे, मैं ही रामलाल हूँ।
देखो, सिर्फ नाम के आधार पर रामलाल ने अपना परिचय स्वयं दे दिया। इसी प्रकार हम आप भी भगवान और माँ भगवती को नहीं जानते, मां के स्वरूप से परिचित नहीं है मां का नाम जानते हैं, सदा माँ और भगवान् का नाम जपते रहेंगे, तब कभी तो आकर वह पूछेंगे कि क्या बात है? क्यों मेरा नाम ले रहे हो? और बिना कोई कठिन तपस्या किये केवल नाम जप से माँ और प्रभु का दर्शन हो जायेगा साधक का जीवन धन्य हो जायेगा।
ऊँ सर्व चैतन्य रूपां तामाद्यां विद्यां च धीमहि बुद्धिं यो नः प्रचोदयात्।
यह पुराणोक्त गायत्री मंत्र है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।