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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, कथा सुनकर घर जाने के बाद आप वक्ता बनो एवं अपने मन को श्रोता बनाओ।फिर मन को प्रेम से समझाओ कि संसार में रस मत ले, क्योंकि यह तो जहर से भरा हुआ है।
मन को समझाकर कहना कि जहर तो खाने के बाद मृत्यु प्रदान करता है, किन्तु संसार का विषयविष विचार मात्र से अधोगति में ले जाता है। मन को समझाओ कि संसार का विषय तो विष से भी ज्यादा खतरनाक है, इसलिए इससे बचने के लिए विश्वनाथ के चरणों की शरण ग्रहण कर।
क्योंकि विश्वनाथ के चरणों में तो विषय-विष से बचाने वाली अनोखी जीवन-संजीवनी विश्राम कर रही है। प्रभु जिस स्थिति में रखें, उसी में संतोष मानोगे, तो ही सुखी हो सकोगे। पुण्य कार्यों में जो सहयोग- सहायता प्रदान करते हैं, वह भी पुण्यभागी बनते हैं।
जिस घर में गरीब का सम्मान है और नीति का धन है, वह घर बैकुण्ठ के समान है। कथा में सुने हुए को यदि हम कार्य रूप में परिणत करें, तभी उसकी सार्थकता है। मरने से पहले वैर और वासना का त्याग कर दो, अन्यथा सद्गति नहीं होगी। भगवत प्रेम जीवन को उन्नत करता है, सांसारिक काम अधोगति में ले जाता है।
प्रेमपूर्ण प्रभु-स्मरण मानव को परमात्मा के निकट पहुंचता है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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