Gardening Vastu Tips: घर में पौधे लगाने से पहले जान लें ये नियम, वरना नहीं मिलेगा शुभ फल

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Gardening Vastu Tips: घर में लगे हरे-भरे पौधे न केवल वातावरण को सुंदर बनाते हैं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का भी प्रतीक माने जाते हैं. यही वजह है कि आजकल लोग अपने घर, बालकनी, छत और गार्डन में विभिन्न प्रकार के पौधे लगाते हैं. हालांकि वास्तु शास्त्र में पौधों को केवल सजावट का साधन नहीं माना गया है. मान्यता है कि सही समय, सही दिशा और उचित नियमों के अनुसार लगाए गए पौधे शुभ फल प्रदान करते हैं, जबकि वास्तु नियमों की अनदेखी करने पर पौधों की वृद्धि रुक सकती है या वे बार-बार सूख सकते हैं. आइए जानते हैं पौधारोपण से जुड़े महत्वपूर्ण वास्तु नियम और उनसे जुड़ी मान्यताओं के बारे में.

शुभ नक्षत्र में पौधे लगाना माना जाता है लाभकारी

वास्तु शास्त्र के अनुसार स्वाति, उत्तरा, हस्त, रोहिणी और मूल नक्षत्र में लगाए गए पौधे तेजी से बढ़ते हैं. मान्यता है कि इन नक्षत्रों में किया गया पौधारोपण शुभ फल देने वाला होता है. इसके अलावा शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर कृष्ण पक्ष की सप्तमी तक का समय भी पौधे लगाने के लिए शुभ माना गया है. कहा जाता है कि यदि व्यक्ति अपने जन्म नक्षत्र के अनुसार पौधे लगाए तो उसे अधिक अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं.

बार-बार सूख रहे हैं पौधे तो हो सकती है यह वजह

कई बार लोग पूरी देखभाल के बावजूद शिकायत करते हैं कि उनके घर के पौधे बार-बार सूख जाते हैं या उनकी ग्रोथ नहीं हो पाती. वास्तु मान्यताओं के अनुसार गलत दिशा, अनुचित स्थान और कुछ महत्वपूर्ण नियमों की अनदेखी भी इसकी एक वजह हो सकती है. इसलिए पौधे लगाने से पहले स्थान और दिशा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है.

मुख्य द्वार के सामने न लगाएं बड़े पौधे

वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है. इसलिए मुख्य द्वार के ठीक सामने बड़े पौधे या पेड़ लगाना उचित नहीं माना जाता. मान्यता है कि बड़े पेड़ों को मुख्य द्वार की ऊंचाई से लगभग तीन गुना दूरी पर लगाना चाहिए, ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित न हो.

घर पर भारी छाया पड़ना नहीं माना जाता शुभ

वास्तु के अनुसार सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच बड़े पेड़ों की घनी छाया का घर पर पड़ना शुभ नहीं माना जाता. कहा जाता है कि इससे घर का ऊर्जा संतुलन प्रभावित हो सकता है और वातावरण में नकारात्मकता या भारीपन महसूस हो सकता है. इसलिए बड़े वृक्ष लगाते समय उनकी स्थिति का ध्यान रखना आवश्यक माना गया है.

पेड़ों को काटने और हटाने के भी हैं नियम

वास्तु शास्त्र में पेड़ों को काटना या एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करना संवेदनशील कार्य माना गया है. मान्यता है कि यदि किसी कारण से पेड़ हटाना आवश्यक हो तो माघ या भाद्रपद का समय इसके लिए उपयुक्त माना जाता है. साथ ही पेड़ हटाने के बाद तीन महीनों के भीतर उसी स्थान पर नया पौधा लगाना भी शुभ माना गया है.

पौधों का ग्रहों से भी बताया गया है संबंध

वास्तु शास्त्र में विभिन्न प्रकार के पौधों और वृक्षों को अलग-अलग ग्रहों से जोड़ा गया है. सूर्य ग्रह का संबंध मजबूत तने वाले वृक्षों जैसे शीशम से माना जाता है. चंद्रमा और शुक्र ग्रह का संबंध लताओं तथा दूध वाले पौधों से बताया गया है. बृहस्पति ग्रह को फलदार वृक्षों का कारक माना जाता है, जबकि बुध का संबंध हरे-भरे और फल रहित पौधों से माना जाता है.

राहु-केतु और शनि से जुड़े पौधे

वास्तु मान्यताओं के अनुसार शनि ग्रह का संबंध सूखे, कमजोर और रसहीन पौधों से माना जाता है. वहीं राहु और केतु को कांटेदार झाड़ियों तथा कांटों वाले पौधों का प्रतिनिधि माना गया है. इसी कारण विभिन्न पौधों को ग्रहों के प्रभाव और ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है.

सुख-समृद्धि के लिए ध्यान रखें ये बातें

वास्तु शास्त्र के अनुसार पौधे केवल पर्यावरण को सुंदर बनाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि उन्हें सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है. इसलिए पौधारोपण करते समय शुभ समय, उचित दिशा और वास्तु नियमों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यता है कि सही तरीके से लगाए गए पौधे घर में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में सहायक होते हैं.

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