पाप की कमाई में से किये गये दान को प्रभु नहीं करते पसंद: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, जो जीवन सही ढंग से नहीं जीता है सामाजिक और शास्त्रीय मर्यादा के विपरीत आचरण करता है वही घबराता है. और अन्तकाल में तो बहुत घबराता है और उसकी अधोगति भी होती है. जीभ से अधिक पाप करने वाला व्यक्ति अगले जन्म में गूंगा होता है.
ऐसा व्यक्ति मिलना कठिन है जिसके हाथों पाप नहीं हुए हों, लेकिन पाप करने के बाद जो पछतावा नहीं करता, वह मनुष्य नहीं. पाप हो जाना बड़ा गुनाह नहीं, किन्तु पाप स्वीकार न करना, किये गये पाप के लिये पश्चाताप न करना सबसे बड़ा गुनाह है. पुण्य गुप्त रखो, पाप प्रगट कर दो. जिसके पाप प्रगट होते हैं, वही निष्पाप बनता है.
जिसके पाप प्रगट नहीं होते, वह चाहे कारागार में न जाये, पर परिणाम बहुत दु:खदाई होता है. जो पाप छिपाता है, उसे पाप छोड़ता नहीं, उसके मन में घर किये रहता है. पापी के जीवन में से शांति छिन जाती है. धन के लिये चाहे जितने पाप करना और फिर ठाकुर जी को थोड़ा सा भोग धराने एवं आरती उतारने के बाद यह समझना कि मेरे सब पाप जल गये हैं, यह भ्रम है.पाप की कमाई में से किये गये दान को प्रभु पसंद नहीं करते.
मानसिक पापों की सजा बहुत भारी होती है. सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना.
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