प्रभु को हमेशा याद रखोगे तभी जीवन होगा सफल: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, नग पर्वत को कहते हैं। न गच्छति, पर्वत एक जगह स्थिर होता है इसलिए उसे नग कहते हैं। पर्वत श्रेष्ठ श्रीकैलाश के भगवान स्वामी है, इसलिए भगवान का एक नाम नागेश्वर महादेव हैं।
एक दारूका  नामकी राक्षसी भगवान शंकर की भक्त थी और एक सुप्रिय नाम का भक्त, उन्हीं की तपस्या से भगवान श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रगट हुए। श्री रामेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना भगवान श्री राम ने समुद्र पर पुल बनाने के समय किया था। श्री रामेश्वर शब्द का अर्थ होता है प्रभु श्री राम के जो ईश्वर हैं। प्रभु श्री राम के द्वारा पूजित भगवान् श्रीरामेश्वर हैं।
महाराष्ट्र में एक सुधर्मा नाम के शिव भक्त हुए, जिनका दो विवाह हुआ था, एक पत्नी का नाम था सुदेहा और दूसरी पत्नी का नाम था घुश्मा।घुश्मा की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान् शिव श्रीघुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए। ज्योतिर्लिंग की कथा सुनने से ज्योतिर्लिंग तीर्थ की यात्रा और पूजा पाठ का पुण्य प्राप्त होता है।
गृहस्थ-जीवन जिसका जीवन दिव्य होता है, वह मरने के बाद देवता बनता है। जिसका जीवन सादा है,वही साधु है। हम सब तुच्छ नहीं, हम सब तो शुद्ध चैतन्य परमात्मा के अंश है – यह बात हमेशा याद रखो। प्रभु को हमेशा याद रखोगे तभी जीवन सफल होगा।
पूरा परिवार एक साथ बैठकर प्रार्थना करे, यही गृहस्थाश्रम का आनंद है।सत्कर्म की प्रेरणा देने के लिए ही बालक के हाथों से सत्कर्म कराओ।यौवन में धीरे-धीरे संयम बढ़ाते हुए भक्ति करोगे तो प्रभु अवश्य मिलेंगे।परोपकार करते समय अभिमान न आ जाए – इसका ध्यान रखो। फल की आसक्ति छोड़कर हमेशा कर्म करते रहने में ही जीवन की सार्थकता है।
जहां मन-हृदय की शुद्धि है, वहां प्रभु का प्राकट्य है। जीव ईश्वर का पुत्र है, वह चरित्रवान एवं पवित्र बने यह प्रभु चाहते  है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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