मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्म ही उसके सुख-दुःख के है कारण: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, शिव के लिये ही शिव के पास जाओ ईश्वर किसी को न सुख देता है और न दुःख। मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्म ही उसके सुख-दुःख के कारण है, किन्तु चंचल मन तो प्रभु को ही सुख-दुःख का कारण समझता है।
यही कारण है कि नासमझ आदमी सुख प्राप्त करने और दुःख से मुक्त होने की लालसा लेकर ही प्रभु के पास जाता है। ऐसी स्वार्थवृत्ति देखकर प्रभु प्रसन्न नहीं होते। अतः प्रभु के पास कुछ प्राप्त करने के लिए नहीं, किन्तु स्वयं प्रभु को प्राप्त करने के लिए जाओ।
जिसके हृदय में से सुख प्राप्ति की अभिलाषा विदा हो जाती है, वही प्रभु का प्यारा बनकर परम सुख प्राप्त करता है। श्रीलक्ष्मीजी को माता मानकर सत्कर्म में उनका उपयोग करोगे तो माँ प्रसन्न रहेंगी। यदि उपभोग की लालसा से प्राप्त धन का दुरुपयोग करोगे तो माता लक्ष्मी दंड देंगी।
दाता के द्वारा प्राप्त अन्न के मात्र एक कण से कीड़ी का पेट भर सकता है। भजनानंदी संतों के मात्र एक क्षण से अनेक पापियों का उद्धार हो सकता है।जहाँ आचार-विचार की शुद्धता है, वहीं भक्ति की परिपुष्टि है। सद्विचार नींव है और सदाचार भवन है। यदि नींव मजबूत होगी तो ही भवन टिक सकेगा।
अपनी इच्छा या बुद्धि से नहीं, अपितु सन्तों के निर्देशानुसार ही सत्कर्म करो।जो ईश्वर के उपकार को भूल जाता है, वह कभी सुखी नहीं हो सकता। जिसकी मति सुकर्म में लगी हो, वह ईश्वर के समान है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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