Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्रीशिवमहापुराण कोटिरूद्र संहिता में द्वादश ज्योतिर्लिंग की कथा है। भगवान शंकर के द्वादश ज्योतिर्लिंग हैं। जो किसी एक प्रान्त में नहीं है। अगर द्वादश ज्योतिर्लिंग का दर्शन किया जाए तो सम्पूर्ण भारतवर्ष का दर्शन हो जाता है।
परमात्मा हमारे चारों तरफ हैं, सच्ची भावना से जाएं, इसी बात को स्पष्ट करने के लिए चारों दिशा में ज्योतिर्लिंग के रूप में भगवान शिव प्रकट हुए। द्वादश ज्योतिर्लिंग का दर्शन जीवन में एक बार अवश्य करना चाहिए, अनेक बार हों यह भगवान की कृपा है। द्वादश ज्योतिर्लिंग का दर्शन पूजन अथवा घर बैठे स्मरण कर लेना चाहिए। एकादश रुद्र और द्वादश ज्योतिर्लिंग का स्मरण विशेष फलदाई है।
द्वादश ज्योतिर्लिंग हैं, वर्ष में बारह मास हैं। जीवन चक्र भी इसी संवत्सर से चलता है। सुरभि से उत्पन्न कश्यप के यहां एकादश रुद्र इनकी उपासना दस इंद्रियां और एक मन से होने वाले पाप को समाप्त कर देती हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंग का वर्णन शिव पुराण में इस प्रकार से है। श्रीसोमनाथ महादेव,
श्री मल्लिकार्जुन महादेव, श्री महाकाल बाबा, श्रीओम्कारेश्वर महादेव, श्री केदारेश्वर महादेव, श्रीभीमेश्वर ज्योतिर्लिंग, काशी में बाबा विश्वनाथ, श्रीत्रयंबकेश्वर महादेव, श्रीवैद्यनाथ भगवान, श्री नागेश्वर महादेव,श्रीरामेश्वर महादेव और श्रीघुश्मेश्वर महादेव की कथा का वर्णन किया गया। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।