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The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, जो मनुष्य प्रतिदिन श्रीमद् भागवत महापुराण का पाठ करता है, उसे एक-एक अक्षर के उच्चारण के साथ कपिला गौ दान देने का पुण्य होता है।
जो प्रतिदिन भागवत के आधे श्लोक या चौथाई श्लोक का पाठ अथवा श्रवण करता है, उसे एक हजार गोदान का फल मिलता है। जो प्रतिदिन पवित्रचित्त होकर भागवत के एक श्लोक का पाठ करता है, वह मनुष्य अठारह पुराणों के पाठ का फल पा लेता है।
जिसके घर में एक श्लोक, आधा श्लोक अथवा श्लोक का एक ही चरण लिखा रहता है, उसके घर में प्रभु सदैव निवास करते हैं। वेदों का तात्पर्य श्री कृष्ण में ही है। यज्ञों के उद्देश्य श्री कृष्ण ही हैं। योग श्री कृष्ण के लिए ही किये जाते हैं और समस्त कर्मों की परिसमाप्ति भी श्री कृष्ण में ही है।
ज्ञान से ब्रह्मस्वरूप श्रीकृष्ण की ही प्राप्ति होती है। तपस्या श्री कृष्ण की प्रसन्नता के लिये ही की जाती है। श्री कृष्ण के लिये ही धर्मों का अनुष्ठान होता है और सब गतियां श्रीकृष्ण में ही समा जाती है।
आप श्रीकृष्ण, वासुदेव, देवकीनन्दन, नन्द गोप के लाडले लाल गोविन्द को हम-सबका बारम्बार प्रणाम है। प्रभु की नाभि से ब्रह्मा का जन्मस्थान कमल प्रकट हुआ, जो सुन्दर कमलों की माला धारण करते हैं, जिनके नेत्र कमल के समान विशाल और कोमल हैं, जिनके चरण-कमलों में कमल का चिन्ह है – श्री कृष्ण! ऐसे आपको भक्तों बार-बार नमस्कार है।
प्रभु आप केवल यशोदा नन्दन ही नहीं हो, समस्त शरीर धारियों के हृदय में रहने वाले उनके साक्षी हो, अंतर्यामी हो! ब्रह्मा जी की प्रार्थना से विश्व की रक्षा करने के लिए आप यदुवंश में अवतीर्ण हुए हो। प्रभु आपकी लीला कथा भी अमृतस्वरूप है। विरह से सताये हुए लोगों के लिए तो वह जीवन सर्वस्व ही है। बड़े-बड़े ज्ञानी महात्माओं, भक्त कवियों ने उसका गान किया है।
वह सारे पाप ताप को मिटती ही है, साथ ही श्रवणमात्र से परममंगल- कल्याण का दान भी करती है। वह परम सुन्दर, परम मधुर और बहुत विस्तृत भी है। जो आपकी लीला कथा का गान करते हैं, वास्तव में भूलोक में वह सबसे बड़े दाता हैं। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।