Surya Grahan Dosh: कुंडली में सूर्य ग्रहण दोष है तो 12 अगस्त की शाम करें ये उपाय, कम हो सकता है बुरा प्रभाव

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Surya Grahan Dosh: ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मविश्वास, करियर, मान-सम्मान और आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखा जाता है. कुंडली में सूर्य और राहु की विशेष स्थिति बनने पर सूर्य ग्रहण दोष बनने की मान्यता है. कहा जाता है कि इस दोष के प्रभाव से व्यक्ति को जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. करियर में उतार-चढ़ाव, आर्थिक स्थिति में अस्थिरता और आत्मविश्वास में कमी जैसी स्थितियां इसके प्रभाव से जुड़ी मानी जाती हैं. मान्यता है कि सूर्य ग्रहण के दिन कुछ विशेष उपाय करने से कुंडली में मौजूद सूर्य ग्रहण दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है. 12 अगस्त की शाम को भी कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं, जिन्हें करने से शुभ परिणाम मिलने की मान्यता है. आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में…

कुंडली में कब बनता है सूर्य ग्रहण दोष?

ज्योतिष के अनुसार, जब कुंडली में सूर्य और राहु एक ही भाव में विराजमान होते हैं या दोनों के बीच समसप्तक योग बनता है, तो सूर्य ग्रहण दोष बनने की मान्यता होती है. इस दोष के कारण व्यक्ति को जीवन में कई तरह के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है. मान्यता के अनुसार, सूर्य ग्रहण दोष का असर करियर और आर्थिक पक्ष पर पड़ सकता है. इसके अलावा व्यक्ति के आत्मविश्वास में भी कमी आ सकती है. हालांकि, कुंडली में किसी दोष का प्रभाव अन्य ग्रहों की स्थिति और कुंडली में बनने वाले दूसरे योगों पर भी निर्भर माना जाता है.

सूर्य ग्रहण दोष को दूर करेंगे ये उपाय

  • सूर्य ग्रहण दोष के बुरे प्रभावों को दूर करने के लिए 12 अगस्त की शाम को गुड़, गेहूं, लाल वस्त्रों आदि का दान करना चाहिए. ये सभी चीजें सूर्य ग्रह से संबंधित मानी गई हैं. ऐसे में सूर्य ग्रहण वाले दिन इन चीजों का दान करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति सुधरने लगती है. मान्यता है कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और करियर तथा आर्थिक क्षेत्र में भी शुभ फलों की प्राप्ति होने लगती है.
  • सूर्य ग्रहण दोष से मुक्त होने के लिए ग्रहण वाले दिन सूर्य ग्रह के मंत्रों का जाप करना चाहिए. सूर्य ग्रह के मंत्र ‘ॐ सूर्याय नमः’ या ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ का जाप किया जा सकता है. इन मंत्रों का जाप किसी एकांत स्थान में बैठकर कम से कम 108 बार करना चाहिए. मान्यता है कि इन मंत्रों के जाप से सूर्य ग्रहण दोष का प्रभाव कम होता है. साथ ही मानसिक शक्ति भी प्राप्त होती है और जीवन में अच्छे बदलाव आने लगते हैं.
  • 12 अगस्त की शाम को आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी शुभ माना गया है. इस स्तोत्र का पाठ करने से कुंडली में मौजूद सूर्य ग्रहण दोष का प्रभाव काफी हद तक कम होने की मान्यता है. इसके साथ ही इस स्तोत्र का पाठ करने से सूर्य ग्रहण के बुरे प्रभावों से भी बचने की बात कही गई है. इस स्तोत्र का पाठ घर के ईशान कोण में बैठकर करना चाहिए. स्तोत्र का पाठ शुरू करने से पहले अपने पास एक दीपक अवश्य जलाएं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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