Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, सच्चे भक्त का हृदय प्रभु के प्रति श्रद्धा एवं प्राप्त परिस्थिति में सन्तोष से लबालब भरा रहता है। किसी भी बात का दुःख उसके अंतर को पीड़ित नहीं करता। किसी भी वस्तु का अभाव उसके हृदय के भाव को बदल नहीं सकता।
वह तो यह मानता है कि मेरे प्रभु की मुझ पर अपार कृपा है, इसीलिए मुझे अपनी योग्यता से अधिक प्रदान किया है, यह मेरा अहोभाग्य है और अगर मेरा प्रभु मुझे दुःख प्रदान करता है तो भी वह मेरी भलाई ही करता है। वह तो प्रभु के प्रत्येक विधान को प्रेम की नजर से ही देखा है।
उसके मन में पुत्र न हो तो भी आनन्द, पुत्र हो तो भी आनन्द। वहाँ तो प्रत्येक परिस्थिति में आनन्द ही आनन्द है। “यूँ भी वाह-वाह और यूँ भी वाह-वाह” यही सच्चे भक्त का जीवन मन्त्र हो सकता है। नई बात अगर योग्य लगे तो विवेकपूर्वक अपनाओ, किन्तु पुराने को एकदम छोड़ मत दो।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।