श्रीकृष्ण का जीवन सिखाता है योग और गृहस्थ का दिव्य समन्वय: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्रीकृष्ण की कथा में शुकदेव जैसे महायोगी और राजा परीक्षित जैसे महागृहस्थ को एक समान आनन्द मिलता है। इसका कारण यह है कि श्रीकृष्ण महायोगी भी हैं और महान गृहस्थ भी हैं । समान्यतः योग और गृहस्थ साथ-साथ नहीं चल सकते।
योगी यदि गृहासक्त हो जायेगा तो उसका पतन होगा और यदि गृहासक्त योगाभ्यास करने जायेगा तो रोगी हो जायेगा। परन्तु श्रीकृष्ण के चरित्र में योग और गृहस्थ का भारी समन्वय है।सोलह हजार एक सौ आठ महारानियों के बीच में बैठने वाले प्रभु श्री कृष्ण महान गृहस्थ भी हैं और बड़े-बड़े योगियों के बीच में बैठने वाले श्रीकृष्ण महान योगी भी हैं।
सोलह हजार एक सौ आठ देवियों के स्वामी होते हुए भी उनके चित्त में संसार का स्पर्श नहीं है। इसीलिए श्रीकृष्ण संसारियों को भी अच्छे लगते हैं और संन्यासियों को भी प्यारे लगते हैं। दुरुपयोग होने पर पैसा जहर है। सदुपयोग होने पर पैसा अमृत है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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