प्रभु को प्राप्त करने के लिए घर नहीं, आसक्ति छोड़ने की है जरूरत: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, मृत्यु जीवन का अनिवार्य सत्य है, यह समझकर मृत्यु से भागें नहीं, स्वीकार करें। मृत्यु के भय को छोड़ें। यह तो परमात्मा का बुलावा आया है, प्रभु की निमंत्रण पत्रिका है। अब भगवान के चरणों में जाने की तैयारी हो रही है, आनन्द होना चाहिए। संतों ने अपनी वाणी में कहा-
मरने से सब जग डरा मेरे मन आनन्द। कब मिलिहौं कब भेटिहौं पूरण परमानन्द।। मृत्यु का भय छूटना चाहिए और मृत्यु का भय तो तब छूटेगा, जब भाव होगा। भाव जागेगा, भय भागेगा। भाव तो उसी में होता है जो भगवान से युक्त हो जाता है। जहां गरीब का सम्मान है और नीति का धन है, वह घर बैकुण्ठ के समान है। यह घर अपना नहीं, प्रभु का प्रेम मंदिर है- इस भावना से इसमें रहो।
मनुष्य मालिक नहीं, प्रभु का मुनीम है।घर में आसक्त हुए बिना ही सगे-सम्बन्धियों की सेवा करो। पत्नी पति-पत्नी का सम्बन्ध केवल संसार के लिए नहीं, कर्तव्यों का पालन करते हुए परमात्मा की भक्ति के लिए है। दम्पति को नाविक और नाव की तरह संसार-सागर पार करना चाहिए। प्रभु को प्राप्त करने के लिए घर नहीं, आसक्ति छोड़ने की जरूरत है।
आपका घर परमात्मा का मन्दिर बन जाए, इस तरह जीवन व्यतीत करो।सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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